अमरीका एकतरफ़ा कार्रवाई बंद करे: गिलानी

 रविवार, 29 जनवरी, 2012 को 14:29 IST तक के समाचार
यूसुफ़ रज़ा गिलानी

गिलानी सरकार और पाकिस्तान सेना के बीच भी तनाव का दौर जारी है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि अमरीका को एकतरफ़ा कार्रवाईयों पर रोक लगानी चाहिए और पाकिस्तान को ये भरोसा दिलाना चाहिए कि "भविष्य में इस तरह की एकतरफ़ा कार्रवाई नहीं की जाएंगी."

स्वीटज़रलैंड के दावोस में मीडिया से बातचीत करते हुए यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान अमरीका के साथ संबंधों को नई शर्तों की बुनियाद पर जारी रखना चाहता है.

अमरीकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार उन्होंने कहा कि वो अमरीका के साथ संबंधों की अहमियत को समझते हैं और "हाल की घटनाओं की रोशनी में, और रिश्तों को लंबे समय तक जारी रखने की गरज़ से हम अपने संबंधों की समीक्षा कर रहे हैं."

समाचार एजेंसी एएफ़पी का कहना है कि यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने ड्रोन हमलों को फिर से जारी किए जाने की भी निंदा की.

विरोध-प्रदर्शन

पाकिस्तान के कराची शहर में शुक्रवार के दिन तक़रीबन एक लाख लोगों ने जमा होकर अमरीकी ड्रोन हमलों के फिर से शुरू होने के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था.

प्रतिकूल प्रभाव

"ड्रोन हमलों की प्रतिकूल प्रतिक्रिया होती है. हमने चरमपंथियों और स्थानीय क़बालियों के बीच दूरी क़ायम करने में पूरी तरह से कामयाबी हासिल की है लेकिन ड्रोन हमलों की वजह से उनके प्रति सहानभूति पैदा होती है."

यूसुफ़ रज़ा गिलानी

एएफ़पी के मुताबिक़ यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने स्वीकार किया कि अमरीका और पाकिस्तान के बीच "भरोसे की कमी है."

उन्होंने कहा, "ड्रोन हमलों की प्रतिकूल प्रतिक्रिया होती है. हमने चरमपंथियों और स्थानीय क़बालियों के बीच दूरी क़ायम करने में पूरी तरह से कामयाबी हासिल की है लेकिन ड्रोन हमलों की वजह से उनके प्रति सहानभूति पैदा होती है."

"इसकी वजह से राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के लिए दिक्क़ते पैदा होती हैं. हमने कभी भी ड्रोन हमलों की इजाज़त नहीं दी है और हमेशा से कहा है कि वो अस्वीकार्य, ग़ैर-क़ानूनी और प्रतिकूल असर डालने वाले हैं."

रिश्ते

हालांकि हाल में सामने आए कुछ राजनयिक संदेशों में कहा गया है कि पाकिस्तान ने ख़ामोशी से ड्रोन हमलों को स्वीकृति दे रखी थी.

दोनों मुल्कों के बीच पिछले साल ओसामा बिन लादेन के ऐबटाबाद ठिकाने पर हमले के बाद रिश्ते बहुत ख़राब हो गए थे.

पाकिस्तान ने उसकी जानकारी के बिना किए गए हमले को अपनी संप्रभुता में दख़लअंदाज़ी बताया था.

मामला तब और बिगड़ गया जब नवंबर में हुए एक अमरीकी ड्रोन हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई.

स्पलाई

ख़राब रिश्तों के बाद पाकिस्तान ने अफग़ानिस्तान में मौजूद नैटो सेना के लिए पाकिस्तान के रास्ते भेजी जाने वाली रसद और दूसरे सामानों की सप्लाई पर रोक लगा दी थी.

यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने हाल में ही बयान में कहा है कि सप्लाई फिर से बहाल किए जाने के मामले को संसद की रक्षा समिति को सौंप दिया गया है जिसकी सिफ़ारिशों के आने के बाद संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाई जाएगी जो इस मामले पर आख़िरी फैसला लेगी.

पाकिस्तान ने अमरीका से एक हवाई ठिकाना भी ख़ाली करवा लिया था.

मंहगा

ख़बरों के अनुसार नैटो की सप्लाई मजबूरी में रूस और मध्य एशिया के मुल्कों के रास्ते की जा रही है जो काफ़ी मंहगी साबित हो रही है.

समाचार एजेंसी एपी ने अमरीकी रक्षा विभाग के हवाले से कहा है कि सप्लाई के कामों में फ़िलहाल 10 करोड़ 40 लाख डॉलर का ख़र्च आ रहा है जो पहले के मुक़ाबले आठ करोड़ 70 लाख अधिक है, जब ये काम पाकिस्तान के रास्ते होता था.

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