
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ़्त दवाई के कारण मरने वाले मरीज़ों की संख्या 100 से अधिक हो गई है और कई मरीज़ों की स्थिति अभी भी गंभीर बताई जा रही है.
लाहौर स्थित बीबीसी संवाददाता अली सलमान के मुताबिक़ तमाम मरीज़ों के मौत का कारण ख़राब दवाई को बताया जा रहा है, जिन्होंने पंजाब इंन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्डियोलॉजी से मुफ़्त इलाज करवाया था.
पाकिस्तान मेडिकल ऐसोशिएशन लाहौर के महासचिव डॉ. इज़हार चौधरी ने बीबीसी को बताया कि लाहौर के विभिन्न अस्पतालों में अभी भी 250 के करीब मरीज़ों का इलाज चल रहा है, जिनमें से 70 की स्थिति गंभीर है.
उन्होंने कहा कि मरने वाले मरीज़ों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो सकती है क्योंकि प्रांत के दूसरे शहरों फ़ैसलाबाद, गुजराँवाला और सियालकोट के सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों की भर्ती किया गया है.
पाँच कंपनियों पर शक़
"दवा बनाने वाली जिन पाँच कंपनियों पर संदेह है, उनमें से तीन के मालकों को गिरफ़्तार किया गया है जबकि दो कंपनियों के मालकों की गिरफ़्तारी के लिए सिंध सरकार से संपर्क में हैं."
डॉ. सईद इलाही, वरिष्ठ अधिकारी
पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर कहा कि मरने वाले मरीज़ों की संख्या 100 से बढ़ गई है और इसमें लिप्त लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
'जाँच रिपोर्ट का इंतेज़ार'
एक वरिष्ठ प्रांतीय अधिकारी डॉ. सईद इलाही ने बताया कि कथित तौर पर ख़राब दवाई के नमूने जाँच के लिए लंदन और पेरिस भिजवाए गए हैं और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ओर कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि दवा बनाने वाली जिन पाँच कंपनियों पर संदेह है, उनमें से तीन के मालिकों को गिरफ़्तार किया गया है जबकि दो कंपनियों के मालिकों की गिरफ़्तारी के लिए सिंध सरकार से संपर्क में हैं.
उन्होंने बताया कि प्रांतीय सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया है और साथ संघीय जाँच एजेंसी ने जाँच का काम शुरु कर दिया है.
सरकार ने इस मामले से जुड़े सभी लोगों के विदेश जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.
ग़ौरलतब है कि यह दवाई लाहौर स्थित पंजाब इंन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्डियोलॉजी के अस्पताल और शहर के अन्य अस्पतालों में मरीज़ों की दी गई थी.




















