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'पाक में तीसरे विकल्प के तौर पर इमरान'

 शनिवार, 24 दिसंबर, 2011 को 23:09 IST तक के समाचार
इमरान ख़ान

इमरान ख़ान पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी हैं.

पाकिस्तान में राजनीतिक गतिविधियाँ अपने चरम पर हैं और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी इमरान ख़ान तीसरे विकल्प के तौर पर सामने आ रहे हैं.

इमरान ख़ान ने बतौर क्रिकेटर 1992 के विश्व कप में पाकिस्तानी टीम को विश्व विजेता का ख़िताब दिलवाया था और उसके तुरंत ही बाद क्रिकेट से सन्यास लिया था.

उन्होंने 1996 में ‘पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़’ के नाम से अपनी पार्टी की घोषणा कर राजनीति में क़दम रखा और पाकिस्तान से भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का संकल्प लिया.

जब उन्होंने नियमित रुप से राजनीति में क़दम रखा तो अधिकतर राजनीतिक दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी कि खेल और राजनीति में बहुत अंतर है. पहले तो उन्हें कोई ख़ास समर्थन नहीं मिला और न ही लोग उनकी पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार थे.

वे फिर भी राजनीति में बने रहे और करीब एक महीना पहले उन्होंने लाहौर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया और सबको हैरान कर दिया कि वे भी किसी से कम नहीं हैं.

समर्थन

लाहौर में हुए उनके सियासी जलसे के बाद विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़, सत्ताधारी दल पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी और दूसरे राजनीतिक दलों के कई नेता उनके पाले में शामिल हो गए. पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी उनका हाथ थाम लिया है.

अधिकतर जानकार मानते हैं कि इमरान ख़ान पर एक ख़ास हाथ की मेहरबानी है और वह है सेना का ताक़तवर हाथ. विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के वरिष्ठ नेता चौधरी निसार अली ख़ान का भी कहना है कि एक ख़ास ख़ुफ़िया एजेंसी इमरान ख़ान पर मेहरबान है.

प्रोफ़ेसर तौसीफ़ अहमद ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “इमरान ख़ान के अचानक सामने आने से यह धारणा मिलती है कि सेना उन्हें तीसरे विकल्प के तौर पर पाकिस्तान की राजनीति में ला रही है.”

"इमरान ख़ान के अचानक सामने आने से यह धारणा मिलती है कि सेना उन्हें तीसरे विकल्प के तौर पर पाकिस्तान की राजनीति में ला रही है."

प्रो. तौसीफ़ अहमद

उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि इमरान ख़ान की पार्टी में जो नेता शामिल हो रहे हैं, वह वहीं हैं जिन्होंने सत्ता पर बने रहने के लिए पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ का समर्थन किया था.

प्रोफ़ेसर तौसीफ़ ने बताया, “इसका दूसरा कारण यह है कि इमरान ख़ान वही बातें कर रहे हैं, जो पाकिस्तानी सेना करती रहती है और उनकी भी वही मांगें हैं जो सेना की हमेशा से रही हैं. इसलिए उनका ताना बाना सेना के साथ जुड़ता हुआ दिख रहा है.”

उनके मुताबिक़ 1996 में जब इमरान ख़ान ने अपनी पार्टी बनाई थी तो उन्होंने आईएसआई के पूर्व प्रमुख जनरल हमीद गुल के साथ मिल कर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की सरकार गिराने की कोशिश की थी.

कराची में शनिवार को एक पत्रकार ने इमरान ख़ान से पूछा कि क्या उनके सर पर कोई ख़ुफ़िया हाथ है, जिस पर उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, “मेरे सर पर ख़ुफ़िया हाथ तो है, बड़ा ताक़तवर ख़ुफ़िया हाथ है, वह उधर वाला है जिसका कोई मुक़ाबला नहीं कर सकता.”

उन्होंने बताया कि उन पर केवल ख़ुदा का हाथ है क्योंकि उन्होंने कई सालों तक लगातार मेहनत की है.

कुछ जानकार इस धारणा को रद्द करते हैं कि इमरान की सफलता के पीछे ख़ुफ़िया एजेंसियों या सेना का कोई हाथ है. प्रोफ़ेसर शमीम अख़तर ने कहा, “मैं इस बात को नहीं मानता कि इमरान ख़ान पर सेना की कोई ख़ास मेहरबानी है.”

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के हर चुनाव में सेना और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का हाथ रहा है और इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि 2008 के चुनाव में पीपुल्स पार्टी को भारी कामयाबी सेना के समर्थन से मिली थी.

प्रोफ़ेसर शमीम ने कहा, “जो राजनीतिक दल अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं, उसके बारे में यही बात कही जाती हैं कि उसके पीछे सेना का हाथ है. जब सब राजनीतिक दलों के पीछे आईएसआई का हाथ है और उसको मौक़ा मिला है तो इमरान को भी एक मौक़ा मिलना चाहिए.”

शक्ति प्रदर्शन

लाहौर, पेशावर, घोटकी और कसूर सहित कई शहरों में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के बाद इमरान ख़ान रविवार को कराची में एक बड़े जलसे को संबोधित करेंगे.

इमरान ख़ान पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार के बग़ल में अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. पूरे शहर में मोहम्मद अली जिन्ना के साथ उनकी तस्वीर वाले पोस्टर लगे हुए हैं जिस लिखा है कि तब पाकिस्तान बनाया था, अब पाकिस्तान बचाएँगे.

कराची के मैदान पर कल पता चलेगा कि इमरान ख़ान अपनी राजनीति पारी में कितने लोगों को क्लीन बोल्ड करते हैं और कितने छक्के जड़ते हैं.

हालाँकि वह साफ़ कर चुके हैं कि वे टेस्ट क्रिकेटर हैं और दूसरे राजनेता केवल क्लब क्रिकेटर हैं.

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