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भारत से सीख लें करज़ई: पाकिस्तानी राजदूत

 बुधवार, 14 दिसंबर, 2011 को 11:49 IST तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल्ला हुसैन हारून

हारून ने भारत के साथ बातचीत में हुए प्रगति की काफ़ी तारीफ़ की

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत ने अफ़ग़ानिस्तान को सलाह दी है कि उसे सिर्फ़ आरोप लगाते रहने के बजाए भारत से सीख लेते हुए परिपक्व व्यवहार करना चाहिए.

अब्दुल्ला हुसैन हारून ने माना कि 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों से आगे आकर भारत-पाकिस्तान संबंधों में काफ़ी सुधार हुआ है और आपसी वार्ता की प्रक्रिया के चलते अब दोनों पड़ोसी देश 'चीज़ों को एक दूसरे के नज़रिए से' देख पा रहे हैं.

समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया को दिए इंटरव्यू में हारून ने कहा, "पाकिस्तान पर आरोप लगाते रहने के बजाए काश राष्ट्रपति करज़ई भारत से सीख लें."

उनका कहना था, "अफ़ग़ानिस्तान में अगर पत्ता भी खड़कता है तो अफ़ग़ान नेता पाकिस्तान की ओर उंगली उठा देते हैं."

हारून के अनुसार, "ऐसे काम नहीं होता है. मेरे ख़्याल से करज़ई के लिए भारत एक अच्छा उदाहरण होगा जहाँ उन्हें समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप से बातें कहीं नहीं बढ़ती."

पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान रिश्ते सुधार रहे हैं तो अफ़ग़ानिस्तान को उससे सीख लेनी चाहिए और उसी राह पर चलना चाहिए.

'परिपक्व व्यवहार'

आरोप-प्रत्यारोप

"अफ़ग़ानिस्तान में अगर पत्ता भी खड़कता है तो अफ़ग़ान नेता पाकिस्तान की ओर उंगली उठा देते हैं. मेरे ख़्याल से करज़ई के लिए भारत एक अच्छा उदाहरण होगा जहाँ उन्हें समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप से बातें कहीं नहीं बढ़ती"

अब्दुल्ला हुसैन हारून, यूएन में पाकिस्तानी राजदूत

हारून का कहना था कि भारत ने अच्छा उदाहरण पेश करते हुए काफ़ी परिपक्व व्यवहार दिखाया है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने काबुल में शिया मुसलमानों को निशाना बनाते हुए किए गए हमले के लिए पिछले हफ़्ते पाकिस्तान को ही ज़िम्मेदार ठहराया था.

पाकिस्तान सरकार से इस बारे में न्याय माँगते हुए करज़ई ने कहा था कि उनका देश पाकिस्तान के साथ ये मामला काफ़ी गंभीरता से उठाएगा.

हारून का कहना था कि जो लोग ये भविष्यवाणी कर रहे हैं कि अगर 26 नवंबर जैसा हमला दोबारा हो गया तो भारत-पाकिस्तान वार्ता टूट जाएगी उनकी बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए.

उन्होंने कहा, "चाहे जो भी हो हमें बातचीत जारी रखने की ज़रूरत है जिससे कोई भी इसे रास्ते से हटाने का साहस न कर सके."

मगर साथ ही हारून ने ये चेतावनी ज़रूर दी कि इस राह में दोनों देशों को कट्टरपंथियों से सचेत रहने की ज़रूरत है क्योंकि वे इससे ख़ुश नहीं होंगे.

उन्होंने कहा, "हमें उसके ख़िलाफ़ तैयार रहने की ज़रूरत है. लोग मारे जाएँगे, मुश्किलें आएँगी मगर एकजुट रहते हुए हम लोगों की संख्या ज़्यादा होगी जो असहिष्णुता, घृणा और संघर्ष का सामना कर लेंगे."

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