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पाकिस्तान में बेग़ैरत ब्रिगेड का आलू-अंडे

 मंगलवार, 25 अक्तूबर, 2011 को 15:14 IST तक के समाचार
आलू अंडे

इस गीत में पाकिस्तानी समाज में मुमताज़ कादरी और अजमल कसाब जैसे लोगों गौरान्वित करने पर टिप्पणी की गई है

पाकिस्तान में आजकल गाने के एक वीडियो की बड़ी चर्चा है. पाकिस्तानी बैंड बेग़ैरत ब्रिगेड का गाना आलू-अंडे आजकल सभी की ज़बान पर है. यू-ट्यूब पर गाने के वीडियो को लाखों लोगों ने देखा है.

गाने के बोलों में इस्लामी चरमपंथ और पाकिस्तानी सेना जैसे वर्जित विषयों का ज़िक्र इस तरह से किया गया है, जैसा पहले नहीं किया गया.

बैंड के सदस्य दानियाल मलिक कहते हैं कि वो गीत के माध्यम से लोकतंत्र विरोधी ताक़तों को संदेश देना चाहते हैं और एक बहस शुरू करना चाहते हैं.

इस गीत में पाकिस्तानी समाज में मुमताज़ कादरी और अजमल कसाब जैसे लोगों गौरवान्वित करने पर टिप्पणी की गई है.

कादरी ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर और पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान तासीर की दिन-दहाड़े हत्या की थी. अजमल कसाब 2008 मुंबई हमले में एकमात्र ज़िंदा हमलावर हैं.

गाने में कहा गया है कि पाकिस्तान में नोबल पुरस्कार विजेता अब्दुस सलाम को इसलिए भुला दिया गया है, क्योंकि उनका ताल्लुक़ अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय से है.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता एम इलियास ख़ान के मुताबिक बेग़ैरत ब्रिगेड में ऐसे तीन व्यक्ति हैं जो दिल्लगी करना तो जानते ही हैं लेकिन वो पाकिस्तान के हालात को लेकर निराश भी हैं.

गाने में आलू और अंडा-करी का प्रयोग कर बेग़ैरत ब्रिगेड पाकिस्तानी समाज पर दुख ज़ाहिर कर रहे हैं, लेकिन क्या बैंड के सदस्यों को इस बात का अंदाज़ा है कि उन्होंने इस गाने के कारण अपनी जान को जोखिम में डाल लिया हो.

पाकिस्तान में ऐसे ढेर सारे मामले हुए हैं जब पत्रकारों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए संकट का सामना करना पड़ा है.

दानियाल मलिक कहते हैं, “जब हम गाने के बोलों पर काम कर रहे थे तो ये बात हमारे दिमाग़ में आई थी कि ऐसा हो सकता है.”

पाकिस्तान में व्यंग्य

कार्टून

ज़हूर बताते हैं कि वर्ष 2007 में हफ़्तों उन्हें तंग किया गया. उनके घर कुछ बिना दाढ़ी वाले लोग आते थे और मध्यरात्रि को उनके घर पर दस्तक देते थे.

हालाँकि पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर काफ़ी व्यंग्य भरे कार्यक्रम होते रहे हैं, लेकिन वो बहुत साहसिक नहीं होते हैं.

ऐसे कई कार्यक्रम भारतीय हिंदी गानों पर आधारित होते हैं जो राजनीतिक हालातों की बात करते हैं, लेकिन उन पर सुरक्षा एजेंसियों और सेना का साया हमेशा मंडराता रहता है.

बैंड बेग़ैरत ब्रिगेड ने अपना गीत यू-ट्यूब पर रिलीज़ किया था.

माना जाता है कि पाकिस्तान में सबसे बेहतर राजनीतिक व्यंग्य 70 और 80 के दशक में हुआ करता था जबकि मीडिया पर सेंसर नियंत्रण बहुत ज़्यादा था.

सत्तर के दशक में ज़्यादातर राजनीतिक व्यंग्य का निशाना राजनीतिज्ञ होते थे. वरिष्ठ पाकिस्तानी अभिनेता अरशद महमूद कहते हैं कि वो घंटों तक लिखी गई स्क्रिप्ट को पढ़ते रहते थे ताकि उसमें ऐसा कुछ भी नहीं हो, जिससे किसी सरकारी आदेश का उल्लंघन तो नहीं होता हो.

लेकिन आज ऐसे वक्त जब टीवी चैनलों में वक्त की भारी कमी होती है, ज़्यादातर व्यंग्य भरे कार्यक्रमों में व्यंग्य कम और ऐसे बातें ज़्यादा होती हैं जिससे उन पर मानहानि का मुक़दमा किया जा सके.

महमूद कहते हैं, “पहले लोगों को जेल में भर दिया जाता था. अब उन्हें सिर में गोली मार दी जाती है.”

पाकिस्तान के मशहूर कार्टूनिस्ट ज़हूर ने एक कार्टून बनाया था जिसमें उन्होंने दिखाया था कि एक तालिबान चरमपंथी के पास हथियार हैं और उसके एक पैर में सैनिकों के जूते हैं. कार्टूनिस्ट सेना और तालिबान के संबंधों पर कटाक्ष करना चाह रहे थे. पाकिस्तानी सेना ने हमेशा ऐसे आरोपों से इनकार किया है.

ज़हूर बताते हैं कि वर्ष 2007 में हफ़्तों उन्हें तंग किया गया. उनके घर कुछ बिना दाढ़ी वाले लोग आते थे और मध्यरात्रि को उनके घर पर दस्तक देते थे.

“मुझे नहीं पता कि वो कौन थे, लेकिन उस दौरान मैने सेना और तालेबान पर कई कार्टून बनाए थे.”

ज़हूर बताते हैं कि मई में ओसामा बिन लादेन की मौत की ख़बर पर चाहते हुए भी उन्होंने कोई कार्टून नहीं बनाया. लेकिन बेग़ैरत ब्रिगेड के कहने का अंदाज़ कुछ और ही है.

गाने में एक तख़्ती पर लिखा है, “अगर आप चाहते हैं कि एक गोली मेरे सिर में मार दी जाए, तो आप वीडियो को पसंद करें.”

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