पाकिस्तानी तालिबान ने दी फिर धमकी

फ़क़ीर (फ़ाईल)

तालिबान ने पहले भी ओसामा की मौत का बदला लेने की घोषणा की थी.

पाकिस्तान के वरिष्ठ तालिबान नेता मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद ने अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसियों को चेतावनी दी है कि वह दोहरा खेल बंद कर दें.

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सह-प्रमुख मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद ने बीबीसी को एक लिखित साक्षात्कार दिया है.

उनका यह बयान काफ़ी समय बात सामने आया है. माना जा रहा था कि उन्होंने गुप्त रुप से सरकार के साथ समझौता किया था जिसके बाद से वे ख़ामोश थे.

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे युद्ध में किसी विदेशी हस्तक्षेप की ज़रुरत नहीं है और न वे इसमें किसी दोहरे खेल को बर्दाश्त करेंगे.

उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि उसने अतीत में अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप किया जिससे स्थिति काफ़ी ख़राब हो गई.

अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे युद्ध में किसी विदेशी हस्तक्षेप की ज़रुरत नहीं है और न वे इसमें किसी दोहरे खेल को बर्दाश्त करेंगे. अतीत में अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप किया गया जिससे स्थिति काफ़ी ख़राब हो गई और अब भी अफ़ग़ानिस्तान में शांति केलिए कोशिश की जा रही है.

मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद, तालिबान नेता

अपने इंटरव्यू में मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान को एक दूसरे की कोई ज़रुरत नहीं है और वे दोनों स्वंत्र रुप से अलग अलग युद्ध लड़ रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने काफ़ी समय बाद अपना बयान क्यों दिया है.

'ओसामा का बदला'

इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता सज्जाद मोहमंद ने कहा था कि ओसामा बिन लादेन की मौत का बदला लेने के लिए उसने व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरु कर दी है.

उन्होंने बताया था कि पहले तालिबान जो हमले करते थे उसमें बड़े हमले भी शामिल होते थे. हालाँकि ज़्यादातर मौक़ों पर छोटे हमले करके स्थानीय स्तर पर बदला लिया जाता था.

प्रवक्ता के अनुसार पहले जब सुरक्षाबल क़बायली इलाक़ों में तालिबान के ख़िलाफ़ अभियान करते थे तो उसका बदला लेने के लिए छोटे हमले किए जाते थे.

हालाँकि उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि तालिबान के हमलावर न केवल क़बायली इलाक़ों तक सीमित हैं बल्कि पाकिस्तान और पूरी दुनिया में मौजूद हैं.

अमरीकी सैनिकों ने दो मई को ऐबटाबाद में कार्रवाई कर अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार डाला था.

लादेन की मौत के बाद चरमपंथियों ने पाकिस्तान में हमले किए थे जिसमें अर्धसैनिक बलों के एक प्रशिक्षण केंद्र पर हमला किया गया था.

एक और हमले में कराची में नौसेना के ठिकाने को निशाना बनाया था.

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