ओसामा को लेकर पाक में प्रदर्शन

ओसामा

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना की भी निंदा की

पाकिस्तान के शहर ऐबटाबाद में हुए अमरीकी अभियान में हुई ओसामा बिन लादेन की मौत के ख़िलाफ़ देश के विभिन्न शहरों में धार्मिक गुटों की आह्वान पर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं.

अनुमान लगाया जा रहा था कि जुमा की नमाज़ के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होंगे लेकिन उतने बड़े पैमाने पर तो प्रदर्शन नहीं हुए.

लेकिन ऐबटाबाद सहित देश के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन किया गया.

एक और दो मई की दरम्यानी रात अमरिकी सैनिकों ने ऐबटाबाद में एक सैन्य अभियान कर ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

इसके ख़िलाफ़ जमाते इस्लामी सहित कुछ धार्मिक संगठनों ने जुमा की नमाज़ के बाद विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी.

प्रदर्शन

क्वेटा के कचलाक इलाके़ में जमीयत उलमाए इस्लाम नज़रयाती गुट की ओर से विरोध प्रदर्शन किया और प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर, प्ले कार्ड और ओसामा की तस्वीरें उठाए 'ओसामा ज़िंदाबाद' और 'अमरीका मुर्दाबाद' के नारे गए.

बजट का साठ प्रतिशत सेना पर ख़र्च किया जाता है लेकिन जब अमरीका ने संप्रभुत्ता का उल्लंघन किया और ऐबटाबाद में कार्रवाई की तो सेना सो रही थी

ऐबटाबाद के प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों में अधिकतर अफ़ग़ान नागरिक थे जिन्होंने ओसामा बिन लादेन के पक्ष में नारे लगाए हुए अमरीका के ख़िलाफ़ युद्ध करने की घोषणा की.

ऐबटाबाद में भी ओसामा बिन लादेन की मौत के ख़िलाफ़ पहली बार विरोध प्रदर्शन किया गया और अमरीकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की गई.

इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या जमाते इस्लामी के कार्यकर्ताओं की थी जो दूसरे शहरों से आए हुए थे.

नेताओं ने भाषण देते हुए कहा कि 'मुसलमानों के लिए ओसामा बिन लादेन की सेवाओं को याद रखा जाएगा और अमरीका के हाथों उन की मौत से हज़ारों ओसामा पैदा होंगे.'

'सेना की आलोचना'

प्रदर्शनकारियों ने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ हुए अमरीकी अभियान को लेकर पाकिस्तानी सेना पर कड़ी आलोचना की.

उन्होंने कहा कि बजट का साठ प्रतिशत सेना पर ख़र्च किया जाता है लेकिन जब अमरीका ने संप्रभुत्ता का उल्लंघन किया और ऐबटाबाद में कार्रवाई की तो सेना सो रही थी.

लाहौर में भी जमाते इस्लामी की ओर विरोध प्रदर्शन किया गया जिस में अमरीका, इसराइल और भारत की कड़ी आलोचना की गई.

प्रदर्शनकारियों ने अमरिका सरकार ने मांग की है कि वह पाकिस्तान में मौजूद अपने सैनिकों को वापस बुलाए और पाकिस्तान के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे.

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