ईश-निंदा मामले में तालिबान की धमकी

आसिया बीबी

आसिया बीबी को पंजाब की एक अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई है.

पाकिस्तान के तालिबान विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि ईश-निंदा करने के आरोप में मौत की सज़ा काट रही एक ईसाई महिला आसिया बीबी को माफ़ी दी गई तो उसके गंभीर परिणाम निकल सकते हैं.

तालिबान के वरिष्ठ नेता मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद ने टेलीफ़ोन पर बीबीसी को बताया कि ईसाई महिला आसिया बीबी के मामले में किसी भी अतंरराष्ट्रीय दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "अगर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर आसिया बीबी को माफ़ी दी तो हम उस फ़ैसले का जम कर विरोध करेंगे जिसके गंभीर परिणाम निकलेंगे."

उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तान एक इस्लामी देश है और इसकी कुछ धार्मिक सीमाएँ हैं जिसके भीतर रहते हुए फ़ैसले लिए जाने चाहिएँ."

मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद ने सरकार से कहा कि आसिया बीबी के मामले में स्थानीय अदालत ने जो फ़ैसला लिया है उसपर अमल को सुनिश्चित किया जाए.

अगर सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आ कर आसिया बीबी को माफ़ी दी तो हम उस फ़ैसले का जम कर विरोध करेंगे जिस के गंभीर परिणाम निकलेंगे. पाकिस्तान एक इस्लामी देश है और इस की कुछ धार्मिक सीमाएँ हैं जिस के भीतर रहते हुए फ़ैसले लिए जाने चाहिएँ.

मौलवी फ़क़ीर मोहम्मद, तालिबान नेता

क़ानून का विरोध

ग़ौरतलब है कि पंजाब प्रांत के ज़िले ननकाना साहब की एक स्थानीय अदालत ने इस महीने के पहले सप्ताह में एक ईसाई महिला आसिया बीबी को ईश-निंदा क़ानून के तहत मौत की सज़ा सुनाई थी. ईसाई समुदाय की ओर से इस क़ानून का काफ़ी विरोध हो रहा है.

ईश-निंदा करने के आरोप में किसी महिला को सज़ा सुनाने की यह पहली घटना है जिसका मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने कड़ा विरोध किया है.

आसिया बीबी ने इस फ़ैसला के ख़िलाफ़ उच्च न्यायलय में याचिका दायर कर दी है और राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी से क्षमा की गुहार लगाई है.

कुछ दिन पहले पंजाब के राज्यपाल सलमान तासीर ने जेल में आसिया बीबी से मुलाक़ात की थी और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी माफ़ी के लिए वे राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से अनुरोध करेंगे.

सलमान तासीर ने इस मामले की एक रिपोर्ट राष्ट्रपति आसिफ ज़रदारी को भी सौँप दी है.

अंतरराष्ट्रीय दबाव

माना जा रहा है कि आसिया बीबी की माफी़ को लेकर पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है लेकिन अधिकारियों ने इसका खंडन किया है.

आसिया बीबी को जिस क़ानून के तहत सज़ा सुनाई गई है उस का घरेलू स्तर पर काफ़ी विरोध हो रहा है.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का मानना है कि यह क़ानून अपल्पसंख्यकों के ख़िलाफ इस्लेमाल हो रहा है और सरकार से ईश-निंदा क़ानून और अन्य नियमों को तुरंत ख़तम करने की माँग की है.

ईश-निंदा कानून के तहत क़ुरान, पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद और इस्लाम से संबंधित कुछ पवित्र शख़्सियतों के बारे में निंदनीय बात कहने से मौत की सज़ा हो सकती है.

पाकिस्तान में एक वर्ग का मानना है कि कई मामलों में इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल भी किया जाता है.

सरकार अब इस तरह के मामलों पर रोक लगाना चाहती है.

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