दिल्ली से निर्देश लेने की कोई ज़रूरत नहीं थी: कृष्णा

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा

कृष्णा ने भारत लौटकर पत्रकारों से बातचीत की है

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि गुरुवार की भारत-पाक वार्ता के दौरान उन्हें दिल्ली से निर्देश लेने की कोई ज़रूरत नहीं थी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वार्ता के दौरान दोनों देशों के रिश्तों से संबंधित मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई और यही उनकी यात्रा की उपलब्धी है.

शुक्रवार को भारत-पाक वार्ता के संदर्भ में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने बातचीत का ठोस नतीजा न निकलने पर कई टिप्पणियाँ की थी.

दिल्ली वापस पहुँचने पर कृष्णा ने संवाददाताओं के सवालों के जवाब दिए और क़ुरैशी की उस टिप्पणी पर भी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी जिसमें क़ुरैशी ने ये कहा था कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल बार-बार दिल्ली से फ़ोन पर निर्देश ले रहा था.

मैं तो दिल्ली से पूरी तरह से कटा हुआ था. मैनें किसी फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया. ये तो बहुत ही असाधारण बयान है कि मैं भारत से बात कर रहा था. कूटनितिक बातचीत में राजनीतिक नेतृत्व से बात करना कोई समस्या की बात नहीं है. लेकिन मैं ज़ोर देकर कहना चाहूँगा कि मेरा कोई संपर्क नहीं था

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा

कृष्णा ने कहा, "मैं विदेश मंत्री क़ुरैशी के साथ किसी बहस में नहीं पड़ना चाहता हूँ. तथ्य यह है कई मुद्दों पर चर्चा हुई और पहल हुई. हमें उनके भारत आकर चर्चा को आगे बढ़ाने का इंतज़ार है. भारत इस वार्ता के लिए पूरी तरह तैयार था. मैंने निर्देशानुसार काम किया और मैं संतु्ष्ट हूँ."

'आतंकवाद सबसे बड़ी अड़चन'

विदेश मंत्री कृष्णा का कहना था, "मैं तो दिल्ली से पूरी तरह से कटा हुआ था. मैनें किसी फ़ोन का इस्तेमाल नहीं किया. ये तो बहुत ही असाधारण बयान है कि मैं भारत से बात कर रहा था. कूटनितिक बातचीत में राजनीतिक नेतृत्व से बात करना कोई समस्या की बात नहीं है. लेकिन मैं ज़ोर देकर कहना चाहूँगा कि मेरा कोई संपर्क नहीं था."

कृष्णा का कहना था, "मुझे दिए गए निर्देश इतने स्पष्ट थे कि मुझे दिल्ली से निर्देश लेने की कोई ज़रूरत नहीं थी....जहाँ तक समयसारिणी का सवाल है तो ये न तो संभव है और न ही व्यवहारिक. जिस तरह के मुद्दों पर हमने बातचीत की है उनके बारे में समयसारिणी तय नहीं की जा सकती."

आतंकवाद दोनों देशों के रिश्तों के बीच सबसे बड़ी अड़चन है. बाकी़ सभी प्रयास नाकाम रहेंगे. पाकिस्तानी नेताओं को इस दिशा में काम करना होगा…मैं इस्लामाबाद गया और वहाँ मैंने दोनों देशों के रिश्तों से संबंधित मुख्य मुद्दों पर बात की...एक तरह से इससे कुछ हद तक विश्वास बढ़ा है

भारतीय विदेश मंत्री कृष्णा

भारतीय विदेश मंत्री कृष्णा ने ज़ोर देकर कहा, "आतंकवाद दोनों देशों के रिश्तों के बीच सबसे बड़ी अड़चन है. बाकी़ सभी प्रयास नाकाम रहेंगे. पाकिस्तानी नेताओं को इस दिशा में काम करना होगा…मैं इस्लामाबाद गया और वहाँ मैंने दोनों देशों के रिश्तों से संबंधित मुख्य मुद्दों पर बात की...एक तरह से इससे कुछ हद तक विश्वास बढ़ा है."

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से पूछा गया कि लश्कर नेता हाफ़िज़ सईद के कथन और भारतीय गृह सचिव के पाक ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के बारे में टिप्पणी की तुलना पर उनका क्या कहना है.

एसएस कृष्णा का कहना था, “इन दोनों व्यक्तियों की तुलना का सवाल ही कहाँ उठता है? हाफ़िज़ सईद जिहाद का नारा लगाते रहे हैं. ये लोग भारत विरोधी प्रचार करते हैं. भारत का मानना है कि ऐसे प्रॉपेगैंडा से भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहतर नहीं होने वाले हैं.”

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