किन्नर से शादी पर पुलिस का डंडा

किन्नर

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों को पुरुषों-महिलाओं के समान अधिकार दिए हैं.

पाकिस्तान के शहर पेशावर की पुलिस ने एक किन्नर के साथ शादी करने के प्रयास में एक पुरुष को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस ने इस शादी में हिस्सा लेने आए 45 मेहमानों को भी गिरफ़्तार किया है. इनमें कुछ किन्नर भी शामिल हैं.

आदेश बेअसर

संवाददाताओं का कहना है कि यह इस तरह का पहला मामला है. इस में रासायनिक खाद के 42 साल के एक कारोबारी और एक किशोर किन्नर का नाम सामने आया है.

पाकिस्तान के क़रीब सभी हिस्सों में बड़ी संख्या में किन्नर रहते हैं. अभी हाल में ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आधाकारिक दर्जा दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपने पंजीकरण के लिए देश के सभी नागरिकों की ओर से भरे जाने वाले फ़ार्म के लिंग वाले कॉलम में एक तीसरा दर्जा भी जोड़ा जाए.

हमने के एक बर्थडे पार्टी का आयोजन किया था लेकिन पुलिस ने हमें गिरफ़्तार कर लिया. हमारा शादी करने का कोई इरादा नहीं था

मलिक इक़बाल, खाद के कारोबारी

हालाँकि इस जोड़े ने इस बात से इनकार किया है कि वे शादी करने जा रहे थे.

इस मामले में गिरफ़्तार मलिक इक़बाल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि पहले से ही उनकी दो बीवियाँ हैं.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि वे इलाक़े में रानी संगीता के नाम से मशहूर किन्नर से शादी करने जा रहे थे.

गिरफ़्तारी के बाद इक़बाल ने पुलिस थाने में कहा, ''हमने के एक बर्थडे पार्टी का आयोजन किया था लेकिन पुलिस ने हमें गिरफ़्तार कर लिया. हमारा शादी करने का कोई इरादा नहीं था.''

रानी संगीता ने भी जोर देते हुए कहा कि कुछ भी ग़लत नहीं हुआ. उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करती रहती है.

इलाक़े के स्थानीय पुलिस अधिकारी अख़्तर अली खटक ने बीबीसी को बताया कि इस जोड़े को एक स्थानीय मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया जहाँ से उन्हें जाँच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया.

खटक ने बताया कि पेशावर के पड़ोसी शहर फ़कीराबाद के एक प्लाजा में आयोजित शादी समारोह में इस जोड़े को कुछ अन्य मेहमानों के साथ गिरफ़्तार किया गया.

पाकिस्तान के सामान्य और शरीयत क़ानून में पुरुष और महिला के अलावा किसी और से शादी करने पर सख़्त प्रतिबंध है.

वर्ष 1990 तक कोई भी महिला अपने अभिभावको की मर्जी के बिना शादी नहीं कर सकती थी.

संवाददाताओं का कहना है कि हाल में मिले समान दर्जे के बाद भी पूरे पाकिस्तान में किन्नरों के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह व्यवहार किया जाता है.

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