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शनिवार, 04 जुलाई, 2009 को 11:46 GMT तक के समाचार

मून को सू ची से मिलने की अनुमति नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून जेल में बंद बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची से मुलाक़ात नहीं कर सकेंगे.

बर्मा की सैन्य सरकार (जुंटा) ने मून की को आंग सान से मिलने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया है.

मून को इस फ़ैसले की जानकारी उस वक़्त दी गई जब वो सैन्य सरकार के नेता जनरल थान श्वे के साथ दूसरे दौर की वार्ता की.

मून ने संवाददाताओं से कहा, “ मैं बहुत निराश हूँ. मुझे ये बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि ये संभव नहीं है.”

इससे पूर्व, सू ची के ख़िलाफ़ नज़रबंदी की शर्ते तोड़ने के आरोपों पर सुनवाई शुक्रवार को नहीं हो सकी और इसे आगे के लिए टाल दिया गया.

दरअसल एक अमरीकी व्यक्ति झील तैर कर उनके घर तक पहुँच गया था जिसके बाद उन पर नज़रबंदी उल्लंघन का आरोप लगा दिया गया.

इसके बाद घर पर नज़रबंद आंग सान सू ची को गिरफ़्तार कर इनसीन जेल भेज दिया गया था.

चुनाव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि प्रशासनिक राजधानी ने-पे ताव में क़रीब आधे घंटे की मुलाक़ात में थान श्वे ने उन्हें बताया कि सू ची के ख़िलाफ़ मुक़दमा चल रहा है और वो नहीं चाहते कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की दखलंदाज़ी हो.

इसके बाद मून बर्मा के मुख्य शहर रंगून रवाना हो गए.

इससे पूर्व, मून ने जनरल थान श्वे के साथ शुक्रवार को भी दो घंटे की बैठक की थी. मून ने कहा कि उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि 2010 में प्रस्तावित चुनाव निष्पक्ष, भयमुक्त और पारदर्शी तरीक़े से कराए जाएँगे.

नोबल का शांति पुरस्कार प्राप्त नेता सू ची ने पिछले दो दशक का ज़्यादातर हिस्सा नज़रबंदी या क़ैद में बिताया है.

अगले साल होने वाले चुनाव सैनिक सरकार के प्रजातंत्र की ओर बढ़ते कदम का हिस्सा हैं लेकिन आलोचकों का कहना है कि चुनाव दिखावा मात्र हैं जिन्हें जनरल की चार दशक तक सत्ता पर बनी रही पकड़ को और मज़बूत करने के लिए कराया जा रहा है.

विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सू ची पर चलाया जा रहा मामला उन्हें चुनाव के बाद तक इससे अलग रखने के लिए रची गई साज़िश है.