|
टमाटर - सब्ज़ी या फल!
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
टमाटर फल है या सब्ज़ी. पिरान कलियार गांव उत्तराखंड से राव मोहम्मद उस्मान ने सवाल किया है.
अगर आप फल-सब्ज़ी की दूकान पर जाएँ तो टमाटर आपको सब्ज़ियों के साथ रखा मिलेगा. लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो टमाटर एक फल है. वनस्पति विज्ञान के अनुसार फल उसे कहते हैं जो पौधे का गूदेदार या फिर पककर सूखा हुआ अंडाशय है जिसमें बीज हों. इस परिभाषा के अनुसार केला, आड़ू, खुबानी, अंगूर, सेव, संतरा, टमाटर, खीरा, सेम की फली आदि सब फल हैं. लेकिन इनमें से कुछ को हम सब्ज़ियों की तरह इस्तेमाल करते हैं. और वनस्पति विज्ञान के अनुसार पौधे की जड़, कंद, डंठल, पत्तियों और फूल को सब्ज़ी की श्रेणी में रखा जाता है. जैसे जड़ हुई आलू, अरबी, गाजर और शलजम. कंद हुई प्याज़ और लहसुन. ऐस्पेरेगस, रुबाब और सैलेरी डंठल की श्रेणी में आते हैं. पत्तों में पत्तागोभी, पालक, सलाद के पत्ते आदि और फूलों में फूलगोभी और ब्रौकली. यानि पौधे का वह हिस्सा जिसमें बीज नहीं होते सब्ज़ी होती है. बेल्जियम की राजधानी ब्रेसल्स से हिंदी फ़िल्मों के अनुरागी अशराज ने पूछा है कि फ़िल्म की कहानी यानी स्क्रिप्ट कैसे लिखी जाती है. फ़िल्म की पटकथा किसी भी कहानी की तरह ही लिखी जाती है. कहानी का जन्म किसी विचार से होता है. हो सकता है आपके साथ कोई मज़ेदार घटना घटी हो. या आप कोई राजनीतिक वक्तव्य देना चाहते हों या किसी चीज़ ने आपको प्रेरित किया हो. लेकिन विचार भर से कहानी नहीं बन जाती. आपको उसे एक शक्ल देनी होती है. सबसे पहले उस विचार को काग़ज़ पर उतारें. पात्रों पर विचार करें, घटनाएं बुनें, जिससे कहानी रोचक होती जाए. हर कहानी का आरंभ, मध्य और अंत होता है. फ़िल्म की कहानी भी अलग नहीं होती. और क्योंकि फ़िल्म एक दृश्य माध्यम है इसलिए इसकी कहानी में विज़ुअल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. साथ ही पात्रों के सम्वाद भी. उर्दू के मशहूर शायर मीर तक़ी मीर का असली नाम क्या था. यह सवाल किया है कोलकाता से संतोष कुमार मधुप ने. मीर तक़ी मीर का नाम था मोहम्मद तक़ी और मीर उनका तख़ल्लुस या कविनाम था. उनका जन्म आगरा में 1723 में हुआ. पिता के देहांत के बाद वो 11 साल की उम्र में दिल्ली चले आए जहाँ उन्होंने पढ़ाई लिखाई की और फिर दिल्ली के मुग़ल दरबार में शायर हो गए. लेकिन जब दिल्ली पर अहमद शाह अब्दाली के हमले होने लगे तो मीर, अवध के नवाब असफ़ुद्दौला के निमन्त्रण पर लखनऊ चले गए और वहीं 1810 में उनका देहांत हुआ. मीर ऐसे समय में हुए जब उर्दू भाषा और शायरी का विकास हो रहा था. मीर ने उर्दू में फ़ारसी के रूपकों का प्रयोग करके बेहतरीन शायरी की. बाद के शायरों जैसे ग़ालिब, ज़ौक़, हसरत, फ़िराक़ ने उनसे प्रेरणा ली. दक्षिण अफ़्रीका को रेनबो नेशन क्यों कहा जाता है. यह पूछते हैं दरभंगा बिहार के जय प्रकाश. जैसा कि आप जानते हैं रेनबो कहते हैं इंद्रधनुष को. दक्षिण अफ़्रीका में जब रंगभेद का अंत हुआ और पहली बार लोकतांत्रिक सरकार का गठन हुआ तो ऐंग्लिकन चर्च के आर्चबिशप डैस्मंड टूटू ने अपने देश को यह संज्ञा दी थी. इसका अभिप्राय यह था कि दक्षिण अफ़्रीका ऐसा देश है जिसमें अलग-अलग जातियों और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं. दक्षिण अफ़्रीका के झंडे में भी इंद्रधनुष के छह रंग शामिल हैं. शुद्ध शहद की क्या पहचान है. उसकी परीक्षा कैसे करें. यह जानना चाहते हैं तिलौथू से वासुदेव प्रसाद.
शुद्ध शहद की पहचान उसके स्वाद और महक से की जा सकती है. 20 डिग्री सैल्सियस तापमान में रखे हुए शहद को अगर छुरी से निकाला जाए तो सीधी धार में निकलना चाहिए. अगर वह अलग अलग बूंदों में नहीं टपकता और गिरने के बाद टीले की तरह इकट्ठा हो जाता है तो ये उसके ताज़ा और शुद्ध होने की पहचान है. लेकिन शहद को जाँचने के और भी तरीक़े हैं. जैसे एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद डालिए. अगर वह पानी में घुल जाता है तो अशुद्ध है और अगर ढेर की तरह गिलास की पैंदी में इकट्ठा हो जाता है तो ठीक है. एक और तरीक़ा ये है कि मोमबत्ती की बत्ती को शहद में डुबोएँ और फिर अतिरिक्त शहद झटक कर उसे जलाएँ. अगर जल जाए तो समझिए शहद शुद्ध है और अगर नहीं जलती तो समझिए उसमें पानी मिला है. एक तरीक़ा ये भी है कि ब्लॉटिंग पेपर लेकर उसपर शहद की कुछ बूंदे टपकाएँ. अगर वह उसे सोख लेता है तो शहद शुद्ध नहीं है और अगर नहीं सोखता तो शुद्ध है. सूर्य को अपने केंद्र के चारों ओर चक्कर लगाने में कितना समय लगता है. पूछते हैं ग्राम राजन, ज़िला गया बिहार से साधु साव सज्जन. अधिकतर खगोलीय पिंडों की तरह सूर्य भी अपनी धुरी पर घूमता है. लेकिन क्योंकि सूर्य जलती हुई गैसों का गोला है और पृथ्वी की तरह ठोस नहीं है इसलिए समूचा सूर्य एक गति से नहीं घूमता. सूर्य की जो काल्पनिक भूमध्यरेखा है उसके आस पास का हिस्सा 25 दिन में एक चक्कर पूरा करता है. जैसे जैसे अक्षांश घटता जाता है उसकी गति धीमी पड़ती जाती है. और उसके ध्रुवीय क्षेत्र एक चक्कर 36 दिन में लगाते हैं. इसी तरह सूर्य का भीतरी भाग उसके बाहरी भाग की गति से नहीं घूमता. वैज्ञानिकों का मत है कि भीतरी भाग ठोस पिंड की तरह घूमता है. अब डॉक्टर से पूछिए.... मोतिहारी बिहार से अब्रार अहमद ने लिखा है कि मेरे दाँत थोड़े ऊपर उठे हुए हैं. क्या इन्हें पीछे किया जा सकता है.
जी हाँ, लेकिन इसके लिए दाँतों में तार बांधना पड़ता है. और दाँत पूरी तरह से सीधे होने में दो तीन साल लगते हैं. इस इलाज की सबसे सही उम्र 11 से 14 साल होती है लेकिन अगर मसूड़े स्वस्थ हैं और हड्डियां मज़बूत हैं तो यह इलाज 40-45 साल तक की उम्र में भी हो सकता है. इसके लिए ऐक्सरे लेना पड़ता है. अगर दाँत काफ़ी बाहर हैं तो उन्हें पीछे करने के लिए दाँतों में जगह बनानी पड़ती है. कई बार कुदरती छीदे दाँत होते हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो दाँत निकालने पड़ते हैं. आमतौर पर कीलों के बाद के एक या दो दाँत निकाले जाते हैं और फिर एक विशेष तकनीक से दाँतो में तार बांधकर उन्हें पीछे किया जाता है. यह काम आम डेंटिस्ट नहीं कर सकता केवल ऑर्थोडॉंटिस्ट ही कर सकता है. क्योंकि दाँतो पर कितना दबाव डाला जाए जिससे एक तरफ़ हड्डी हटे और दूसरी तरफ़ हड्डी बने. अगर अधिक दबाव डाला जाएगा तो दाँत मर भी सकता है. जब दाँत पूरी तरह पीछे हो जाते हैं तो तार खोल दिए जाते हैं और तार वाली एक प्लेट दी जाती है जिन्हें रीटेनर्स कहा जाता है. इन्हें एक साल पहनना पड़ता है और धीरे धीरे करके इसका प्रयोग घटाया जाता है. सियाचिन ग्लेशियर कहाँ पर स्थित है. मुम्बई से अमितोष मिश्रा ने यह सवाल किया है. सियाचिन ग्लेशियर हिमालय की पूर्वी कराकोरम पर्वतमाला में स्थित है और 70 किलोमीटर लंबा यह ग्लेशियर इस पर्वतमाला का सबसे बड़ा ग्लेशियर है. जाड़ों में यहाँ औसत 35 फ़िट बर्फ़ पड़ती है और तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे चला जाता है. यह भारत और पाकिस्तान की विवादास्पद सीमा के साथ पड़ता है इसलिए यहां झड़पें भी होती रहती हैं. दोनों देशों ने यहां अपनी सैन्य उपस्थिति बना रखी है. |
इससे जुड़ी ख़बरें
सूर्य की पहली किरण कहाँ?13 अक्तूबर, 2008 | पहला पन्ना
बिग बैंग थ्यौरी क्या है?28 मई, 2008 | पहला पन्ना
क्या नींद से हमें ऊर्जा मिलती है!07 अगस्त, 2008 | पहला पन्ना
ज़मीन पर कितना पानी?01 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना
ये ई - सिगरेट क्या है भला!01 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना
किसी का मन पढ़ने की कला...04 अक्तूबर, 2008 | पहला पन्ना
चींटियों की एकजुटता...09 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना
|
|||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||