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सपनों का आना-जाना!
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हम सपने क्यों देखते हैं, इस सवाल का जवाब मांगा है गांव मुंसरी, हनुमानगढ़ राजस्थान से किशोर कुमार भाम्भू, चंडीगढ़ से चरंजीव
सिंह और इंदौर मध्य प्रदेश से विजय ने.
ये सवाल हज़ारों सालों से दार्शनिकों को भरमाता रहा है. इस क्षेत्र में बहुत अनुसंधान हुए हैं और बहुत से सिद्धांत विकसित किए गए हैं लेकिन किसी एक पर सहमति नहीं बन पाई है. कुछ लोगों का मानना है कि सपने निरर्थक और निरुद्देश्य होते हैं जबकि कुछ का कहना है कि सपने हमारे मानसिक, भावात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी हैं. लेकिन, ये सभी मानते हैं कि हमें सपने नींद के रैपिड आई मूवमेंट या आरईऐम चरण के दौरान आते हैं. रैपिड आई मूवमेंट का मतलब है, बंद आंख के भीतर पुतलियों का तीव्र गति से इधर उधर घूमना. एक रात की नींद में 4 या 5 बार आरईऐम के चरण आते हैं. शुरु में ये काफ़ी छोटे होते हैं लेकिन रात बीतने के साथ साथ ये लंबे होते जाते हैं. इस चरण में हमारी आंखों की पुतलियां तेज़ी से घूमती हैं, हमारे मस्तिष्क की गति तेज़ हो जाती है जबकि हमारी मांसपेशियां बिल्कुल शिथिल पड़ जाती है. इस सिद्धांत के मानने वालों का कहना है कि जागृत अवस्था में हमारा मस्तिष्क निरंतर संदेश ग्रहण करने और भेजने का काम करता रहता है. जिससे हमारा शरीर गतिशील बना रहता है. लेकिन जब हम नींद के आरईऐम चरण में होते हैं तो हमारा शरीर शिथिल हो जाता है जबकि हमारा मस्तिष्क और गतिशील हो उठता है. ऐसी स्थिति में सपने शारीरिक गतिविधि का स्थान ले लेते हैं. जाने माने मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रॉयड का यही मानना था कि सपने हमारी अचेतन इच्छाओं और विचारों के प्रतिनिधि होते हैं. क्योंकि हम जागृत अवस्था में इन्हें व्यक्त नहीं कर सकते इसलिए इन्हें अचेतन मन में धकेल देते हैं और जब हम नींद में होते हैं तो ये सपनों के रूप में प्रकट होते हैं. लेकिन जब तक ये सिद्धांत प्रमाणित या अप्रमाणित नहीं होते कुछ कहना कठिन है. नई दिल्ली से दलजीत सिंह मसूता ने सवाल किया है कि पेड़ की उम्र का पता कैसे लगाया जा सकता है.
पेड़ की उम्र का पता लगाने के कई तरीक़े हैं. सबसे आसान तरीक़ा यह है कि उसका तना काट लिया जाए और उसमें जितने घेरे हों उन्हें गिन लिया जाए. हर साल पेड़ के तने में एक घेरा बढ़ता जाता है. इसलिए पेड़ के तने में जितने घेरे होंगे उसकी उम्र उतनी ही होगी. पेड़ के तने के घेरे गिनने का एक और तरीक़ा भी है जिसमें पेड़ को काटना नहीं पड़ता. उसे कोर साम्पलिंग कहते हैं. इसमें शंकु के आकार का लोहे का एक यंत्र होता है जिसे घुमाकर तने में घुसाया जाता है और बाहर निकाल लिया जाता है. उसके साथ ही पेड़ के भीतर की लकड़ी का नमूना आ जाता है. उसके घेरे गिनकर पेड़ की उम्र का पता लगा लिया जाता है. पेड़ की उम्र का पता लगाने के लिए विभिन्न जातियों के पेड़ों की तालिकाएँ भी बनी हुई हैं जिसमें पेड़ के आयतन, ऊँचाई के आधार पर उम्र का अनुमान लगाया जाता है. किस ग्रह को पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह कहा जाता है. ग्राम राजन, गया बिहार से साधु साव सज्जन. शुक्र को पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह कहा जाता है क्योंकि आकार और द्रव्यमान की दृष्टि से दोनों समान हैं. शुक्र का व्यास 12103.6 किलोमीटर है जबकि पृथ्वी का 12756.3 किलोमीटर. लेकिन यह समानता बस यहीं तक है. सूर्य से शुक्र की दूरी 10 करोड़ 82 लाख किलोमीटर है जबकि पृथ्वी की 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर है. यानि शुक्र सूर्य के अधिक क़रीब है इसलिए वहां का औसत तापमान 464 डिग्री सैल्सियस है जबकि पृथ्वी का औसत तापमान 15 सैल्सियस है. शुक्र के वायुमंडल में 96 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड है जबकि पृथ्वी के वायुमंडल में 77 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन है. इसलिए शुक्र की सतह पथरीली और ज्वालामुखीय मैदानों से भरी है जबकि पृथ्वी पर जल और जीवन है. सउदी अरब का राष्ट्रगान क्या है. इसे किसने लिखा और किसने इसकी धुन बनाई. यह जानना चाहते हैं मश्के बलोचिस्तान से माजिद बलोच. सउदी अरब का राष्ट्रगान लिखा है इब्राहिम ख़फ़ाजी ने और इसकी धुन बनाई है अब्दुल रहमान अल ख़तीब ने. इसका शीर्षक है अस्सलाम अल मलिकि. विश्व बैंक किस देश की संस्था है. क्या विश्व बैंक में व्यक्तिगत खाता होता है या देश का. यह सवाल किया है गांव मनिहारी, पाली राजस्थान से शंकर लाल. विश्व बैंक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बना बैंक है जो विकासोन्मुख देशों को विकास योजनाओं के लिए उधार देता है. यह सामान्य बैंको जैसा नहीं है इसलिए इसमें व्यक्ति या देश के खाते नहीं होते. बल्कि यह दो विकास संस्थाओं IBRD और IDA से मिलकर बना है. दुनिया के 185 देश इसके सदस्य हैं. इसकी स्थापना 27 दिसंबर 1945 को हुई थी. विश्व बैंक ने 25 करोड़ डॉलर का पहला उधार फ़्रांस को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए दिया था. यह विकासोन्मुख देशों को कम ब्याज पर, या ब्याज रहित उधार देता है और कभी कभी अनुदान भी देता है. वर्ष 2008 की बेइजिंग ओलंपिक खेलों की मशाल किन देशों से होकर गुज़री. ग्राम रमपुरवा, पश्चिमी चम्पारण बिहार से मोहम्मद अमन क़ुरैशी ने यह पूछा है. ओलंपिक मशाल यात्रा 24 मार्च 2008 को ग्रीस के ओलम्पिया शहर से शुरू होकर चीन, कज़ाकस्तान, तुर्की, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, अमरीका, अर्जनटीना, तन्ज़ानिया, ओमान, पाकिस्तान, भारत, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम और मकाऊ होती हुई चीन पहुंची. एक लाख 37 हज़ार किलोमीटर की इस यात्रा में 129 दिन लगे. डॉक्टर से पूछिए.... अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ से पूनम अग्रवाल ने लिखा है कि वो ल्यूकोडर्मा से पीड़ित हैं. इस बीमारी के बारे में जानना चाहती हैं और ये भी कि क्या इसका इलाज संभव है. ल्यूकोडर्मा एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारी त्वचा पर सफ़ेद रंग के चकत्ते से हो जाते हैं. इन्हे आम ज़बान में सफ़ेद दाग़ भी कहा जाता है. इसमें व्यक्ति को कोई तकलीफ़ नहीं होती और न इसका संक्रामण होता है बस यह देखने में बुरा लगता है. हमारी त्वचा के नीचे रंग की कोशिकाएं होती हैं जिन्हे मैलनिन कहा जाता है. इन्ही से हमारी त्वचा का रंग बनता है. लेकिन इस बीमारी में मैलनिन नष्ट हो जाता है. जहां जहां यह नष्ट होता है वहीं से त्वचा सफ़ेद होने लगती है. इसका क्या कारण है यह कोई नहीं जानता लेकिन यह माना जाता है कि वंशानुगत कारण, तनाव, धूप से त्वचा का जलना, बीमारी या चोट से भी कई बार मैलनिन नष्ट हो जाता है. इसका पूरी तरह इलाज तो संभव नहीं लेकिन कई बार फ़ोटो थैरेपी से त्वचा में बचे मैलनिन को उत्तेजित करके उसकी मात्रा बढ़ाई जाती है जिससे त्वचा का रंग वापस आ सके. |
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