बुधवार, 19 नवंबर, 2008 को 08:47 GMT तक के समाचार
किम्बर्ली मैकलेन डाकोस्टा
हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय
क्या बराक ओबामा काले हैं?
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किससे और कब ये सवाल पूछ रहे हैं.
कुछ लोगों को हालांकि इस बात में कोई विवाद नज़र नहीं आता कि बराक ओबामा अमरीका के पहले काले राष्ट्रपति होंगे लेकिन ये बात कुछ अन्य लोगों के लिए सच नहीं है.
एक प्रसिद्ध अफ़्रीक़ी-अमरीकी लेखिका देबरा डिकरसन ने ओबमा को काले कहे जाने पर आपत्ति जताई है. उनका तर्क है कि ओबमा का वंशज दासों से नहीं है इसलिए वो पूरे तौर पर काले नहीं हैं.
ओबामा को काला कहे जाने पर बहुत लोग विरोध भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनके के पिता काले थे लेकिन उनकी माता गोरी थीं इसलिए उन्हें काला कहना सही नहीं है.
उन लोगों के अनुसार ओबामा वास्तव में मिश्रित-नस्ल के हैं.
तर्क के विरूद्ध तर्क
मैं समझती हूँ कि ओबामा की 'नस्लीय शुद्धता' पर सवाल खड़ा करना ही ख़ुद प्रश्न को घेरे में ला खड़ा करता है. क्योंकि यहाँ ये माना जा रहा है कि नस्लीय पहचान की 'शुद्धता' को खोजा जा सकता है और इस का जवाब मिलना निश्चित है.
इस सिद्धांत के अनुसार नस्ल एक वास्तविक चीज़ है जो निर्धारित या प्राकृतिक है. जो उस सिद्धांत को झुठलाता है जिसमें पाया गया कि नस्ल काल और स्थान के अनुसार बदलता रहता है. जिसे शिक्षाविद ‘सामाजिक निर्माण’ कहते हैं.
जब लोग ये ज़ोर देते हैं कि ओबामा काले हैं तो दरअसल वो अपने को भी उसी तरह देखते हैं. वो ये सोचते है कि जब अधिकतर लोग उन्हें देखें तो एक काले आदमी के तौर पर देखें.
काला कहने का मतलब है कि लोग उनके विकास और संघर्ष की बीच के संबंधों को स्वीकार करने लगे हैं.
जब दूसरे ओबामा को एक मिश्रित-नस्ल के कहते है वो इस तथ्य को उजागर करते है कि वो एक गोरी मां से हैं न कि एक काले पिता से हैं.
उन्हें मिश्रित-नस्ल से कहना दरअसल सदियों के नस्लीय शुद्धता पर सवाल खड़े करने जैसा है.
आज से 20 साल पहले ये अगर ये सवाल उठता कि ओबामा किस नस्ल के है तो उसके उठने से पहले जवाब मिल जाता.
और जो लोग कह रहे है कि ओबामा को मिश्रित-नस्ल के रुप में जाना जाए तो उन्हें मालुम होना चाहिए कि अमरीकी इतिहास में मिश्रित-नस्लीय पहचान को मान्यता नहीं मिल सकी है.
काले या मिश्रित-नस्ल
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| ओबामा के पिता काले थे जबकि मां गोरी थीं |
ओबमा काले हैं या मिश्रित-नस्ल के हैं ये सवाल उन अंतर-जातीय लोगों में बुनियादी नासमझी को उजागर करते हैं. जो शीत युद्ध के बाद पैदा हुए हैं.
मैं अफ़्रीक़ी- अमरीकी पिता और आइरिश माता की औलाद हूँ. हम नस्लीय बदलाव से जुझते रहे हैं. जहां नस्ल पर नोकझोक आम बात रही है.
मैंने अपने परिवार में ही पहली बार प्यार और संरक्षण के बीच नस्लीय पूर्वाग्रह को महसूस किया था.
मेरे लिए काला और मिश्रित-नस्ल परस्पर भिन्न नहीं है. हम लोगों ने इस विरोधाभास के साथ जीना सीख लिया है.
शायद यही समय की आवश्यकता है.
किंबर्ली डाकोस्टा हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अफ्रीकी और अफ्रीकन-अमेरिकन स्टडीज़ और सामाजिक मामलों की प्रोफ़ेसर हैं और ये उनके निजी विचार हैं.