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अमीर देश वादा पूरा नहीं कर रहे: संयुक्त राष्ट्र
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के अमीर देश ग़रीब देशों को वित्तीय मदद देने का अपना वादा पूरा नहीं
कर रहे हैं.
सहस्राब्दि विकास के लक्ष्यों की ओर बढने संबंधी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2015 तक दुनिया से ग़रीबी घटाने के लक्ष्य के लिए यह ख़तरे की बात है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि हालात में कुछ सुधार अवश्य हुआ है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. दुनिया के बडे नेताओं ने आठ वर्ष पहले महत्वाकांक्षी लक्ष्यों रखे थे जिनका मक़सद वर्ष 2015 तक ग़रीबी, भुखमरी और बीमारियों में कमीं लाना है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के धनी देश अपनी प्रतिबद्धता का पालन नहीं कर रहे हैं जिसे उन्होंने वर्ष 2005 के ग्लेनईग्ल्स सम्मेलन में व्यक्त किया था. रिपोर्ट के अनुसार सहायता को बढाकर एक वर्ष में 18 बिलियन डॉलर करने की ज़रूरत है. बीत रहा है समय
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस रिपोर्ट को 'सतर्क कर देने वाली'' बताया है. बान की मून ने कहा, ''सदस्य देशों ने सहायता का जो वादा किया था, वह अधूरा है और उसमें विलंब हो रहा है.'' उन्होंने कहा, '' ग़रीबी के ख़िलाफ़ मुहिम में हम दूसरे चरण में हैं. समय बीतता जा रहा है. '' संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने अमरीका, जापान और यूरोपीय संघ से धन देने के लिए कहा है जिसका उन्होंने पहले वचन दिया था. यूरोपीय राजनयिकों का कहना है कि खाड़ी के अमीर देश और चीन अधिक सहायता दे सकते है. अगले माह संयुक्त राष्ट्र महासभा की न्यूयॉर्क में होने वाली बैठक के अवसर पर दुनियाभर के नेता एकजुट होंगे और ग़रीबी कम करने के लक्ष्यों पर विचार विमर्श करेंगे. आर्थिक मंदी, खाद्यान्न की कमी और तेल की ऊंची क़ीमतों के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र का तर्क है कि दुनिया के सबसे ग़रीब देशों की मदद के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए. |
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