बुधवार, 20 अगस्त, 2008 को 02:49 GMT तक के समाचार
रूस ने जॉर्जिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के मसौदे को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि ये फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी के संघर्षविराम की शर्तों के विपरीत है.
पिछले सप्ताह फ्रांस के राष्ट्रपति के प्रयासों से संघर्ष विराम हो गया था.
प्रस्ताव के इस मसौदे में जॉर्जिया की सीमा का सम्मान करने की बात कही गई है और रूस से संघर्ष से पहले की स्थिति में सेनाओं की वापसी की बात कही है.
लेकिन रूस का कहना है कि पिछले सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते में उसकी सेनाओं को दक्षिण ओसेतिया की सीमा के एक क्षेत्र में बने रहने पर सहमति हो गई थी.
नैटो की चेतावनी भी ख़ारिज
इसके पहले रूस ने नैटो की उस चेतावनी को भी ख़ारिज कर दिया था जिसमें उससे कहा गया था कि जब तक जॉर्जिया में उसकी फ़ौजें हैं रिश्तों का सामान्य होना असंभव है.
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोफ़ ने नैटो पर पूर्वाग्रही होने और तिब्लिसी के 'आपराधिक शासन' को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि रूस जॉर्जिया पर कब्ज़ा नहीं कर रहा है और उसका इरादा दक्षिण ओसेतिया के इलाक़े में जाने का भी नहीं है.
इससे पहले नैटो ने माँग की थी कि यूरोपीय संघ की मध्यस्थता में हुए संघर्ष विराम के अनुसार रूस को जॉर्जिया से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए.
उधर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी कहा है कि अब समय आ गया जब रूसी फ़ौजों को वहाँ से लौट जाना चाहिए जहाँ वे संघर्ष शुरू होने के पहले थीं.
रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवदेव ने फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी को फ़ोन पर सूचना दी है कि रूसी सेना 21-22 अगस्त तक जॉर्जिया से हट जाएगी.
उन्होंने कहा है कि कोई 500 सैनिक दक्षिण ओसेतिया की सीमा से लगे शांतिरक्षा चौकियों पर बचे रहेंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रूसी सैना अब भी तैनात हैं और जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी के पास रूसी चेक पॉइंट अब भी बने हुए हैं.
इस संघर्ष की शुरुआत सात अगस्त को तब हुई थी जब जॉर्जिया ने टूटकर अलग हुए दक्षिण ओसेतिया पर फिर से नियंत्रण के लिए गोलाबारी शुरु की थी.
दक्षिण ओसेतिया को रूस का समर्थन प्राप्त है और इस संघर्ष के बाद रूसी सेनाएँ जॉर्जिया के भीतर प्रवेश कर गईं थीं.