शुक्रवार, 25 जुलाई, 2008 को 11:32 GMT तक के समाचार
दुनिया के 143 चुनिंदा शहरों में किए गए अध्ययन से पता चला है कि विदेशियों के रहने के लिए मॉस्को सबसे महँगा शहर है जबकि कराची 141 वें नंबर पर है.
मॉस्को पिछले दो साल से लगातार महँगे शहरों में शीर्ष पर बना हुआ है और यह तीसरा साल है. नई दिल्ली इस सूची में 55वीं पायदान पर है.
पश्चिमी यूरोप और एशिया के शहर शीर्ष 20 महँगे शहरों में बने हुए हैं जबकि पूर्वी यूरोप, भारत और ब्राज़ील के शहर इस ओर बढ़ रहे हैं.
मानव संसाधन कंपनी 'मर्सर' ने इन शहरों में मकान किराया, खानपान, पेट्रोल जैसी चीज़ों पर होने वाले ख़र्च का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद यह दावा किया है.
इसके मुताबिक़ मॉस्को में कॉफ़ी पीना भी बहुत ख़र्चीला साबित हो रहा है. यहाँ के कैफ़े में एक कप कॉफ़ी के लिए 10 अमरीकी डॉलर से ज़्यादा चुकाना पड़ रहा है.
महँगे शहरों की इस सूची में टोक्यो ने दो छलाँग लगाई है और वह अब मॉस्को के बाद दूसरे पायदान पर पहुँच गया है.
लंदन हुआ सस्ता
लंदन पिछले साल दूसरे स्थान पर था लेकिन यह इस साल एक सीढ़ी नीचे तीसरे स्थान पर आ गया है यानी यहाँ रहना कुछ सस्ता हुआ है. चौथे पायदान पर ओस्लो का नाम आया है.
मर्सर के शोध प्रबंधक वोन्ने टार्बर कहते हैं, "अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले रूसी मुद्रा रूबल के मज़बूत पड़ने और वहाँ रहने के बढ़ते ख़र्च के कारण विदेशियों के लिए मॉस्को में महँगाई और बढ़ गई है."
इस अध्ययन में 143 शहरों में 200 तरह के सामानों की क़ीमतों की तुलना की गई.
इसमें जो तीन सबसे सस्ते शहर निकले उनमें पाकिस्तान का कराची, इक्वाडोर का क्विटो और पराग्वे का असुन्सियन शामिल है.
असुन्सियन लगातार छठे साल विदेशियों के लिए दुनिया का सबसे सस्ता शहर साबित हुआ है.
मुद्रा का असर
मर्सर का कहना है कि अमरीकी डॉलर के कमज़ोर पड़ने का महँगे शहरों के दर्जे पर असर हुआ है.
टर्बर कहते हैं, "हालाँकि पश्चिमी यूरोप और एशिया के पारंपरिक रूप से महँगे शहर अब भी शीर्ष 20 महँगे शहरों में बने हुए हैं. पूर्वी यूरोप, ब्राज़ील और भारत के शहर सूची में चढ़ रहे हैं."
वे बताते हैं, "इसके उलट स्टॉकहोम और न्यूयॉर्क जैसे शहर तुलनात्मक रूप से कुछ सस्ते होते दिख रहे हैं."
उसी तरह ब्रिटेन के शहरों में लंदन एक पायदान नीचे उतरा है. बर्मिंघम 41वें से 66वें और ग्लासगो 69वें से 36वें पायदान पर आ गया है.
टर्बर कहते हैं, "अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले यूरो और दूसरी यूरोपीय मुद्राओं की मज़बूती के मद्देनज़र ब्रिटिश पाउंड अपेक्षाकृत स्थिर रहा."
उनका कहना है, "अमरीका की तुलना में यूरो के प्रचलन वाले शहरों में रहने का ख़र्च बढ़ा है लेकिन ब्रिटेन के शहर सूची में नीचे आए हैं."