रविवार, 06 जुलाई, 2008 को 12:41 GMT तक के समाचार
बीबीसी को जानकारी मिली है कि अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में सोने की तस्करी में शामिल शांति रक्षक बल के तीन अधिकारियों को सिर्फ़ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था.
संयुक्त राष्ट्र की एक जाँच रिपोर्ट में पाया गया था कि ये तीनों अधिकारी सोने की तस्करी और सोने के बदले विद्रोहियों को हथियार देने के मामले में लिप्त थे.
संयुक्त राष्ट्र ने पाया था कि इन अधिकारियों ने एक स्थानीय व्यापारी को पकड़कर उसकी पिटाई की थी क्योंकि वे एक सौदे में गड़बड़ी के बाद अपनी रक़म वापस पाना चाहते थे.
भारतीय सेना ने कहा था कि अगर ये लोग दोषी होंगे तो उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा लेकिन भारतीय सेना की जाँच के बाद उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया.
अप्रैल महीने में बीबीसी एक ऐसी रिपोर्ट मिली थी जिससे यह साबित होता है कि भारत और पाकिस्तान के शांतिरक्षक सैनिक कांगो में सोने और हथियारों की तस्करी में लिप्त थे.
पाकिस्तान सरकार लगातार इसका खंडन करती रही है जबकि भारत सरकार ने माना था कि ऐसा एक मामला है.
वर्ष 2005 में संयुक्त राष्ट्र ने कुछ पाकिस्तानी शांति रक्षकों को इसलिए कांगो भेजा था ताकि वहाँ हो रही सोने की तस्करी को रोका जा सके लेकिन शांति रक्षक खुद ही इस तस्करी में लिप्त हो गए.
संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों पर इस तरह के आरोप वर्ष 2005 में ही सामने आ गए थे पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस दिशा में तत्काल कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई.
शांतिरक्षकों के इस तस्करी में लिप्त होने की ख़बर धीरे-धीरे चारों तरफ फैलने लगी जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2006 की शुरुआत में एक आंतरिक जांच के आदेश भी दे दिए थे.
इस जाँच की शुरुआत के बाद कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे. मसलन, कुछ शांतिरक्षक कांगो में अपनी नियुक्ति के दौरान सोने की तस्करी में लिप्त थे और सोना हासिल करने के लिए इन्होंने चरमपंथी संगठनों को हथियार तक दिए.