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जी-8 में बढ़ती क़ीमतों पर रहेगा ज़ोर
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जापान में दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों का वार्षिक सम्मेलन, जी-8 चल रहा है.
जापान सरकार ने पहले उम्मीद जताई थी कि बातचीत में प्रमुख मुद्दा जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित रहेगा. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि तेल और खाद्यान्न की बढ़ती क़ीमतों का मसला जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से ज़्यादा महत्वपूर्ण रह सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रमुख जोस मैनुएल बरोसो ने कहा है कि वे चाहते हैं कि यूरोपीय संघ इस्तेमाल में न लाई गई सब्सिडी का 1.6 अरब डॉलर अफ़्रीका के किसानों की मदद के कोष में दे दे. उन्होंने कहा कि वे इससे बीज और खाद जैसी ज़रूरी वस्तुओं में इस्तेमाल किया जा सकेगा. जी-8 नेताओं के साथ सात अफ़्रीकी नेताओं की बातचीत हो रही है जिसमें उम्मीद की जा रही है कि खाद्य पदार्थों और तेल की बढ़ती क़ीमतों के मामले में भी चर्चा की जाएगी. जी-8 के प्रमुख मुद्दों में जलवायु परिवर्तन और ज़िम्बाब्वे में चल रहा राजनीतिक विवाद भी शामिल है. खाद्यान्न को प्रमुखता ये सम्मेलन जापान के उत्तर में स्थित एक निर्जन द्वीप हुकाइदो में एक रिसॉर्ट पर आयोजित किया जा रहा है जहाँ सुरक्षा के लिए क़रीब 20 हज़ार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. सम्मेलन में शामिल आठ देशों में ब्रिटेन, कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस और अमरीका हैं.
अमरीका के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सम्मेलन में शामिल नेता ज़िम्बाब्वे के विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव में रॉबर्ट मुगाबे के चुने जाने का कड़ा विरोध करेंगे. संवाददाताओं का कहना है कि वर्तमान में विश्व अर्थव्यवस्था में खाद्यान्न के क़ीमतों के असर ने अन्य सभी गंभीर मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है. इन्हीं मुद्दों की वजह से चीन, भारत और कुछ अफ़्रीकी देशों को भी इस सम्मेलन में बुलाया गया है. हमारे संवाददाता का कहना है कि जी-8 विशेषज्ञों के एक दल का गठन कर सकता है जो भविष्य में आने वाले ऐसे दूसरे संकटों से निपटने के बारे में सलाह दे सके. यूरोपीय संघ की योजना यूरोपीय संघ ने पहले ही खाद्य पदार्थों की कमी को दूर करने की योजना बना ली है. यूरोपीय संघ के प्रमुख जोस मेनुअल बरोसो ने संवाददाताओं से कहा कि सम्मेलन में एक अरब यूरो की राशि विकासशील देशों के किसानों को देने का प्रस्ताव है जो यूरोपीय संघ की सहायता राशि में से दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इससे बीज जैसी ज़रूरी चीजें किसानों को मिल सकेंगी जिन्हें उन्हें बहुत ज़्यादा ज़रूरत है. जापानी समाचार पत्र आशी शिंबुन के अनुसार जी-8 देश खाद्य पदार्थों के संरक्षण के लिए ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिससे कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके. जापानी प्रधानमंत्री यासुओ फ़ुकुदा ने पहले कहा था कि वे ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिसमें 2050 तक ग्रीनहाउस गैसों में 50 फ़ीसदी की कमी कर दी जाए. पिछले दिनों कई देशों में खाद्यान्न की कीमतों को लेकर हिंसा हुई है और विश्व बैंक का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में इनकी संख्या दोगुनी हो गई है. |
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