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बर्लिन में 'हिटलर' का सर धड़ से अलग
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जर्मनी के बर्लिन में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है. उस पर आरोप है कि उसने नए मैडम तुसॉद म्यूज़ियम में हिटलर की मोम
की मूर्ति का सर धड़ से अलग कर दिया.
शनिवार को ही यह म्यूज़ियम खुला था और इसके कुछ ही घंटों बाद 41 वर्षीय इस व्यक्ति ने मूर्ति पर हमला किया. ऐसे देश में जहाँ नाज़ी प्रतीक चिन्हों पर भी प्रतिबंध है, म्यूज़ियम में हिटलर की मूर्ति शामिल करने को लेकर पहले ही विवाद था. लेकिन प्रदर्शनी के आयोजकों का तर्क था कि हिटलर के बिना जर्मनी के इतिहास का बयान पूरा नहीं हो सकता. उनका कहना है कि मोम की इस मूर्ति में हिलटर को आत्महत्या करने के कुछ समय पहले के क्षणों में दिखाया गया है. इसमें वे हारे हुए हताश अपने बंकर में बैठे दिखाई पड़ रहे हैं. प्रदर्शनी में हिटलर को एक टेबल के पीछे बैठे हुए प्रदर्शित किया गया था जिससे कि लोग मूर्ति के साथ फ़ोटो न खिंचवा सकें और उसे नुक़सान भी न पहुँचाएँ. पुलिस का कहना है कि मूर्ति को नुक़सान पहुँचाने वाले व्यक्ति ने सुरक्षाकर्मी को धकेल कर किनारे कर दिया था. पुलिस प्रवक्ता बर्नहार्ड श्रोडोवस्की ने बताया, "सुरक्षाकर्मी ने उस व्यक्ति को रोकने का प्रयास किया लेकिन उसने उसे धकेला और हिटलर की मूर्ति के पास जाकर उसका सर धड़ से अलग कर दिया." प्रदर्शनी में मौजूद एक दूसरे दर्शक ने बताया कि वह व्यक्ति सीधे मूर्ति की ओर बढ़ा और टेबल के पीछे पहुँच गया. रिपोर्ट के मुताबिक़ हमला करने वाला व्यक्ति म्यूज़ियम में प्रवेश करने वाला दूसरा दर्शक था. विवादित मैडम तुसॉद म्यूज़ियम में हिटलर की मूर्ति लगाने का फ़ैसला शुरु से ही विवाद में था. मैडम तुसॉद की नताली रॉस का कहना है, "हमने प्रदर्शनी शुरु करने से पहले बर्लिनवासियों और बर्लिन आने वाले पर्यटकों के बीच एक सर्वेक्षण किया था और नतीजे साफ़ थे कि लोग जिन मूर्तियों को देखना चाहते थे, उनमें से हिटलर की मूर्ति भी एक थी." "जब हम जर्मनी का इतिहास दिखाने की कोशिश कर रहे थे तो हिटलर को छोड़ना संभव नहीं था..हम सच दिखाना चाहते थे."
मीडिया में इस फ़ैसले की निंदा किए जाने के बावजूद जर्मनी में यहूदियों की केंद्रीय संस्था के महासचिव स्टीफ़न क्रैमर ने कहा था कि वे हिटलर की प्रतिमा लगाए जाने का विरोध नहीं करेंगे बशर्ते उसे सही ढंग से लगाया जाए. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा था, "हिलटर की प्रतिमा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र नहीं बननी चाहिए लेकिन अगर यह प्रदर्शनी हिटलर के प्रति लोगों के व्यवहार को सामान्य बनाने में मदद करती है, उसके रहस्य को कम करती है तो इसकी कोशिश भी करके देखनी चाहिए." उनका कहना था, "किसी को इतिहास के पन्नों से हटा देने से उस नुक़सान की भरपाई नहीं हो सकती जो उसने पहुँचाया और उसका किया अपराध ख़त्म नहीं हो सकता. बल्कि इसका उल्टा ही असर होता है." इस प्रदर्शनी में कार्लमार्क्स, बीथोवन, बाख़ और आइंस्टाइन की प्रतिमाएँ भी लगाई गई हैं. विदेशियों में विंस्टन चर्चिल, मिख़ाइल गोर्बाच्येव और टॉम क्रूज़ की प्रतिमाएँ प्रमुख हैं. |
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