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मंगलवार, 10 जून, 2008 को 13:53 GMT तक के समाचार
 
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रिश्तों में गर्माहट लाने की कोशिश...
 

 
 
जोहान्सबर्ग का व्यापारिक केंद्र
पिछले क़रीब 150 वर्षों से भारतीय दक्षिण अफ़्रीका में रह रहे हैं
भारत और दक्षिण अफ़्रीका के पुराने रिश्तों में गर्माहट लाने की कोशिश शुरू हो गई है. भारत सरकार यहाँ पर इस वर्ष तीन सितम्बर से पाँच अक्टूबर तक साँस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है.

जोहानेसबर्ग में भारत के कौंसिलर जनरल नवदीप सूरी ने बताया कि एक शानदार बॉलीवुड म्यूज़िकल- बॉलीवुड लव स्टोरी का आयोजन किया जाएगा.

कथक को अपने विशेष नए अंदाज़ मे अदिति मंगलदास पेश करेंगी और भारत के जानेमाने समकालीन लेखक और बुद्धिजीवी भी यहाँ आएँगे.

 भारतीयों का कहना है की इतनी असुरक्षा की भावना तो शायद रंगभेद के दिनों मे भी नहीं थी जितनी आज है.
 

समकालीन भारतीय चित्रों की प्रदर्शनी, सत्याग्रह पर प्रदर्शनी और चर्चित बैंड 'इंडियन ओशन' का संगीत कार्यक्रम शायद अफ़्रीकियों को भारत के बारे मे जानने का अवसर दे. क्योंकि अभी तक वे उन्हीं भारतीयों से मिले है जो 150 वर्षों से यहाँ हैं और बदलते भारत की तस्वीर नहीं दिखाते.

सिनेमा प्रेमियों के लिए आमिर ख़ान की फ़िल्में होंगी. उन्हें यहाँ लाने की पूरी तैयारी भी है.

भारतीयों का योगदान

दक्षिण अफ़्रीका के समाज निर्माण में भारतीयों के योगदान को कोई नकारता नही है. 'इन दी मेन्योर' या 'गोबर में' नाम की एक नई आत्मकथा बाज़ार में आई है. इसके लेखक है रोनी गोवेंदर, जो भारतीय मूल के हैं और भारतीयों के जीवन को अपनी लेखनी से रेखांकित करते रहे है.

इस समय विदेशियों पर हुए हमलों ने समाज के हर वर्ग को हिला के रख दिया है. भारतीयों का कहना है की इतनी असुरक्षा की भावना तो शायद रंगभेद के दिनों मे भी नहीं थी जितनी आज है.

जोहानेसबर्ग
हाल के वर्षों में जोहानेसबर्ग में हिंसा बढ़ी है

एक भारतीय की हत्या हुई, कई दुकानें जला दी गई. ग़रीबी और बढ़ती महंगाई ने आदमी को हैवान बना दिया है. दक्षिण अफ़्रीका मे बढ़ते अपराध के ख़िलाफ़ मंगलवार को राजधानी प्रेटोरिया मे 'मिलियन मैन मार्च' का आयोजन हुआ.

लोग राष्ट्रपति के दफ़्तर तक पहुचे जिससे वो उनकी आवाज़ सुन सकें. अपराध रोकने के लिए क़दम उठाने के लिए उन्हें मजबूर कर सकें.

जोहानेसबर्ग के 'सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट' में एक ज़माने में सभी दफ़्तर हुआ करते थे. ऊँची ऊँची इमारतें आज भी है पर अपराध इतना बढ़ गया है कि लोग इस इलाक़े को छोड़ कर चले गए.

अब सरकार इस क्षेत्र को फिर से पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है. पर यहाँ इमारतों मे अभी भी जगह-जगह शीशे टूटे दिख जाते है और उनसे झाँकते बच्चों के चेहरे.

ये ग़रीब परिवारों के बच्चे है जिन्होंने सिर छुपाने के लिए खाली पड़ी इमारतों का सहारा लिया है.

यूँ तो जोहानेसबर्ग किसी यूरोपीय शहर से कम नहीं. चौड़ी सड़कें, दक्षिण अफ़्रीका का सबसे शानदार शॉपिंग सेंटर और बेहतरीन मौसम. फिर भी यहाँ से पढ़े-लिखे लोग तेज़ी से पलायन कर रहे है.

जानना चाहते है क्यों? क्योंकि वे यहाँ असुरक्षित महसूस करते है. शाम ढलते ही आपको घरो में घुसना पड़ता है क्योंकि अँधेरे के बाद ख़तरा बढ़ जाता है.

एक हिन्दुस्तानी ने कहा कि उनके पास सब कुछ है फिर भी उनका परिवार यहाँ नही रहना चाहता.

यहाँ बलात्कार आम है और एक सिगरेट के लिए भी कोई आपकी जान ले सकता है. चोरी का डर नहीं, पर हिंसक अपराध डर पैदा करते हैं.

 
 
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