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गुरुवार, 15 मई, 2008 को 12:11 GMT तक के समाचार

फ़लस्तीनियों ने 'महाविपत्ति' याद की

फ़लस्तीनी लोगों ने इसराइल की संस्थापना के साठ साल पूरे होने के मौक़े को 'अल नक़बा' यानी 'महाविपत्ति' के रूप में मनाया है और इस अवसर पर उन्होंने अनेक मार्च और प्रदर्शनों का आयोजन किया.

1948 जब इसराइल ने अपने गठन की घोषणा की थी तो उसके फौरन बाद लड़ाई शुरू हो गई थी. उस लड़ाई के दौरान ही सात लाख से ज़्यादा फ़लस्तीनियों को या तो अपना घर छोड़ना पड़ा था या फिर उन्हें जबरन घर से निकाल दिया गया था.

तब से फ़लस्तीनी लोग अपने एक स्वतंत्र राष्ट्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस विवाद पर मध्य पूर्व देशों और इसराइल के बीच कई लड़ाइयाँ भी हो चुकी हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी इसराइल के गठन की साठवीं वर्षगाँठ के मौक़े पर बुधवार को इसराइल का दौरा शुरू किया था.

जॉर्ज बुश गुरूवार को भी इसराइल के गठन की साठवीं वर्षगाँठ के मौक़े पर होने वाले सरकारी समारोहों में भाग ले रहे हैं. हालाँकि बुश ने यह भी कहा है कि वह इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अपना समर्थन भी देंगे.

जॉर्ज बुश की यात्रा के दूसरे दिन यानी गुरूवार को फ़लस्तीनियों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं. फ़लस्तीनियों ने पश्चिमी तट इलाक़े में इसराइली सेना की चौकियों की तरफ़ मार्च किया है.

एक अन्य शहर रामल्लाह में भी प्रदर्शन किया गया है. रामल्लाह में ही फ़लस्तीनी प्राधिकरण का मुख्यालय है.

ग़ज़ा शहर में इस्लामी जेहाद चरमपंथी संगठन ने लगभग 500 स्कूली बच्चों की एक रैली आयोजित की. सभी बच्चे सैनिक वर्दी पहने हुए थे.

इसराइल के गठन के साठ साल बाद भी फ़लस्तीनी लोग अब भी अपने एक स्वतंत्र राष्ट्र के निर्माण का इंतज़ार कर रहे हैं.

लंबा संघर्ष

1948 में इसराइल के गठन के बाद हुई लड़ाई के समय जो फ़लस्तीनी बेघर हो गए थे उसके बाद वो और उनके बाद की पीढ़ियाँ शरणार्थी शिविरों और बिखरी हुई बस्तियों में रहने को मजबूर हैं.

फ़लस्तीनियों की यह हालत ही किसी भी शांति वार्ता में सबसे अहम मुद्दा रहता है.

जॉर्ज बुश ने अपना यह विश्वास दोहराया है कि एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र के निर्माण के मुद्दे पर इसराइल और फ़लस्तीनी लोगों के बीच वर्ष 2008 के अंत तक कोई सहमति बनने के आसार नज़र आते हैं. इसराइल और फ़लस्तीनियों ने नवंबर 2007 में हुए सम्मेलन में इस बारे में संकल्प व्यक्त किया था.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इस बारे में बहुत कम लोग ही आशान्वित हैं क्योंकि बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है, हालाँकि अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस कई बार मध्य पूर्व क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं.

येरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता कात्या एडलर का कहना है कि एक तरफ़ तो जॉर्ज बुश ने इसराइल की सराहना की है दूसरी तरफ़ बहुत से फ़लस्तीनियों का आरोप है कि इसराइल निर्दोष और मासूम फ़लस्तीनियों को नुक़सान पहुँचा रहा है और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के ज़रिए फ़लस्तीनियों को सामूहिक दंड दे रहा है.

जॉर्ज बुश ने इसराइली संसद - नेसेट के संबोधन के लिए तैयार किए गए अपने भाषण में कहा था कि अमरीका इन माँगों को सिरे से ख़ारिज करता है कि वह इसराइल के साथ अपने संबंध तोड़ दे.

जॉर्ज बुश ने कहा, "इसराइल की आबादी भले ही लगभग सत्तर लाख हो लेकिन जब आप आतंक और बुराई का सामना करते हैं तो आप तीस करोड़ के बराबर मज़बूती हासिल कर लेते हैं क्योंकि आपके साथ अमरीका खड़ा है."