मंगलवार, 13 मई, 2008 को 12:08 GMT तक के समाचार
चीन में सोमवार को आए ज़बरदस्त भूकंप के बाद बड़े पैमाने पर बचाव और राहत कार्य जारी है. चीन ने कहा है कि वो विदेश मदद स्वीकार करेगा.
चीनी अधिकारियों का कहना है कि केवल एक शहर में ही 18 हज़ार लोग
मलबे तले दब गए हैं.
आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 12 हज़ार बताई जा रही है लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक केवल दो काउंटी में ही हज़ारों लोग लापता हैं.
वेनचुआन प्रांत में आख़िरकर सैनिक पहुँच गए हैं. भूकंप का केंद्र इसी इलाके में था और ये क्षेत्र पूरी तरह कटा हुआ था. हालांकि भारी बारिश के चलते राहत कार्यों में बाधा आ रही है.
वहीं सिचुआन प्रांत में मलबे तले दबे हज़ारों लोगों को ढूँढने की कोशिश जारी है.
चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया है. उन्होंने अपील की है कि जल्द से जल्द सड़कों पर पड़ी रुकावटों को हटाया जाए ताकि प्रभावित इलाक़ों तक मदद पहुँच सके.
लोगों से मिलने गए वेन जियाबाओ ने कहा," जहाँ थोड़ी सी भी उम्मीद है, हम अपनी कोशिशें 100 गुना बढ़ा देंगे और ज़रा सी भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी."
भूस्खलन और बड़े-बड़े पत्थरों के कारण सड़क मार्ग पर रुकावट आ रही है. ख़राब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर भी ज़मीन पर नहीं उतर पा रहे.
मदद की गुहार
राहत कार्यों में मदद के लिए करीब पचास हज़ार सैनिक तैनात किए गए हैं हालांकि सब सैनिक अभी तक प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँच नहीं पाए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने रक्तदान और घायलों की मदद करने की अपील की है.
बीबीसी संवाददाता माइकल ब्रिसटो ने डूजियांगयेन प्रांत में तबाही का मंज़र बयां किया है. वे बताते हैं कि कैसे दो लोगों के रिश्तेदार मलबे तले दबे हुए हैं- ये लोग अपने रिश्तेदार से मोबाइल पर बात कर सकते हैं लेकिन उन तक पहुँच नहीं सकते.
डूजियांगयेन प्रांत के एक स्कूल में करीब 900 बच्चे इमारत के मलबे तले दब गए थे. इनमें से करीब 50 बच्चों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. चीनी प्रधानमंत्री भी इस इलाक़े में आए थे.
चीन में सोमवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर ढाई बजे भूकंप आया था और इसकी तीव्रता अब 7.9 बताई जा रही है. इसके झटके बीजिंग और बैंकॉक तक महसूस किए जा सकते थे.
मंगलवार को भी झटके महसूस किए गए.
उधर वेनचुआन प्रांत में अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में पता नहीं चल पाया है. इस इलाक़े से एक वरिष्ठ अधिकारी ने सेटेलाइट फ़ोन के ज़रिए मदद की अपील की थी और यही संपर्क का एक मात्र सूत्र था.