रविवार, 11 मई, 2008 को 22:05 GMT तक के समाचार
बर्मा में तूफ़ान के 10 दिन बीत जाने के बाद पहले के मुकाबले तूफ़ान प्रभावित लोगों तक अब ज़्यादा राहत सामग्री पहुँचना शुरू हो गई है ताकि उनको जल्द राहत मिल सके.
तूफ़ान से बुरी तरह से प्रभावित हुए बर्मा के लोगों को इस वक्त भोजन, पानी, आवास और दवाइयों की जल्द से जल्द आवश्यकता है.
ऐसी जानकारी आ रही है कि तूफ़ान से सर्वाधिक प्रभावित हुए इरावड़ी क्षेत्र में बीमारियाँ और संक्रमण फ़ैलता जा रहा है.
राहत मुहैया कराने वाली संस्थाओं का कहना है कि बर्मा की सैन्य सरकार अभी भी राहत कार्यों को अपने नियंत्रण में रखे हुए है.
इस वजह से बाहरी राहतकर्मियों को अभी भी बर्मा में जाकर राहत कार्यों में मदद करने की इजाज़त नहीं मिल पाई है.
उधर अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन मेकन के दो वरिष्ठ प्रचारकों ने बर्मा की सैनिक सरकार से संबंध के आरोप लगने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया है.
इनमें से एक डोउग गुडइयर पर आरोप लगा है कि उन्होंने बर्मा की सरकार की छवि को अच्छा बताकर प्रचारित करने के लिए पैसे लिए हैं.
तीन मई को बर्मा में आए भीषण तूफ़ान में 23 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. हालांकि अमरीका का आकलन है कि तूफ़ान में मरनेवालों की तादाद एक लाख़ के क़रीब है.
रवैये में नरमी
हालांकि ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि राहत कार्यों को लेकर बर्मा की सैन्य सरकार अब कुछ नरमी बरत रही है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम को 38 टन राहत सामग्री बाँटने की अनुमति दी गई है. ये सामान रंगून हवाईअड्डे पर अटका पड़ा था.
कई एजेंसियों ने भी बताया है कि उनके काम में प्रगति हो रही है. हालांकि उनका कहना है कि जो राहत सामग्री पहुँच रही है वो नाकाफ़ी है.
ऑक्सफ़ैम के मुताबिक पानी और साफ़-सफ़ाई के बगैर तूफ़ान से मरने वालों की संख्या एक लाख से बढ़कर डेढ़ लाख हो सकती है.
आठ दिन पहले आए नर्गिस तूफ़ान के कारण मची तबाही के बाद अब बचे हुए लोग शिविरों में इकट्ठा होना शुरू हो गए हैं.
माना जा रहा है कि राहत सामग्री लिए अमरीका का पहला विमान सोमवार को पहुँचेगा. अभी तक चीन,थाईलैंड और भारत जैसे देशों से ही राहत सामग्री आई है.
इससे पहले शनिवार को संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया था कि केवल एक चौथाई प्रभावित लोगों तक ही मदद पहुँची है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि बर्मा में अधिकारियों की ओर से अब सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं.