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मक्खी के कितने दाँत?
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मक्खी के कितने दाँत होते हैं. यह सवाल नई दिल्ली से अर्चना ने पूछा है.
मक्खियों के दाँत नहीं होते. उनके मुँह के भाग कुछ ऐसे होते हैं जो स्पंज की तरह काम करते हैं और भोजन को सोख लेते हैं. इसलिए उनका भोजन तरल होना चाहिए. उनकी जीभ उस स्ट्रॉ जैसी होती है जिससे हम ठंडा पेय पीते हैं. जब मक्खियाँ दूसरे कीड़ों को खाती हैं तो भी उनके भीतरी भाग को चूसती हैं. जब वो हमारे भोजन पर बैठती हैं तो उसपर उलटी करती हैं. इस उलटी में जो पाचक रस, ऐन्ज़ाइम और लार होती है वह उस भोजन को पिघलाती है जिससे मक्खी उसे चूस सके. मक्खी क्योंकि जगह-जगह बैठती है इसलिए उसके कीटाणु उसके मुँह पर चिपक जाते हैं और जब वो भोजन पर उलटी करती है तो वो कीटाणु भी वहाँ पहुँच जाते हैं. इसीलिए ऐसी जगह खाना खाना ख़तरनाक होता है जहाँ मक्खी बैठ रही हों. सब प्राइम मॉर्टगेज क्या होती है? यह जानना चाहते हैं बलिया उत्तर प्रदेश से ब्रजेंद्र कुमार मिश्र. घर ख़रीदने के लिए बैंक जो उधार देते हैं उसे मॉर्टगेज कहते हैं. वैसे बैंकों को उतना ही उधार देना चाहिए जितना ग्राहक चुका सके. क्योंकि जितनी लंबी अवधि के लिए उधार दिया गया है, ग्राहक को उसके भीतर हर महीने उसकी क़िस्त चुकानी पड़ती है. लेकिन क्योंकि बाज़ार में पैसा बहुत था इसलिए अधिकांश बैंकों की ख़तरा मोल लेने की क्षमता बढ़ती गई. उन्होंने अधिक से अधिक पैसा देना शुरू कर दिया. बिचौलिए जो मॉर्टगेज की व्यवस्था करते हैं उन्होंने भी ग्राहकों को उकसाया कि आपको और पैसा मिल सकता है. सब प्राइम मॉर्टगेज उसे कहते हैं जहाँ ग्राहक का पैसे न लौटाने का ख़तरा अधिक हो. दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा कौन सी है. हिंदी किस स्थान पर है. यह सवाल आया है लखनऊ से.... इन्होंने अपना नाम ही नहीं लिखा. ब्रिटिश साम्राज्य सबसे बड़ा था इसलिए लगता यही है कि सबसे अधिक अंग्रेज़ी ही बोली जाती होगी लेकिन सच्चाई ये है कि चीनी मैंडरिन भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है जो अनुमानतः एक अरब पाँच करोड़ है. दूसरे नंबर पर आती है स्पेनिश भाषा जिसे कोई पचास करोड़ लोग बोलते हैं. अंग्रेज़ी तीसरे नंबर पर है फिर है अरबी और पाँचवे नंबर पर आती है. उसके बाद है हिंदी. इस क्रम को लेकर सब एकमत नहीं हैं लेकिन ये सभी मानते हैं कि चीनी मैंडरिन सबसे अधिक बोली जाती है. क़लम का सिपाही, पुस्तक किसने लिखी है. यह सवाल पूछा है बाड़मेर राजस्थान के गणपत सिंह राजपुरोहित फोगेरा ने. इस पुस्तक का पूरा नाम है प्रेमचंद : क़लम का सिपाही और इसके लेखक हैं प्रेमचंद के पुत्र और हिंदी के जाने-माने लेखक अमृत राय. यह प्रेमचंद की जीवनी है जिसे 1956 में साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला था. बालों में रूसी क्यों पड़ती है और इससे छुटकारा पाने के क्या उपाय हैं. यह सवाल किया है ग्राम पवना, भोजपुर बिहार से सतीश कुमार कुशवाहा ने.
सतीश जी, हर रोज़ हमारे सिर की त्वचा की बहुत सी कोशिकाएँ मरती हैं लेकिन जब ये सामान्य से अधिक संख्या में मरने लगती हैं तो वो इकट्ठा होकर सफ़ेद रंग की पपड़ी में बदल जाती हैं. इसी को रूसी या फ्यास कहते हैं. यह किसलिए पैदा होती है इसके बारे में कई राय हैं लेकिन इसका दोष आमतौर पर पिटीरॉस्पोरम ओवेल नामकी फफूंद पर मढ़ा जाता है जो सिर की त्वचा में प्राकृतिक रूप से रहती है और अगर हमारी त्वचा की ग्रंथियों से प्राकृतिक तेल ज़्यादा निकलता है तो उससे रूसी को बढ़ने में और मदद मिल जाती है. यह माना जाता है कि रूसी की प्रवृत्ति आनुवांशिक होती है. तनाव और जलवायु परिवर्तन से भी रूसी हो सकती है. आमतौर पर रूसी दूर करने वाले बाल धोने के शैम्पू कारगर साबित होते हैं लेकिन ज़रूरी नहीं कि जो शैम्पू एक व्यक्ति के लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ वह दूसरे के लिए भी कारगर हो. हाँ, ऐसी रूसी जिससे बहुत खुजलाहट हो जो हल्के पीले रंग की हो, वह सैबोरॉइक ऐक्ज़िमा के कारण होती है. उसके लिए स्टैरॉइड लोशन की ज़रूरत पड़ती है. आदमी अपने पूरे जीवन में सोने, खाने और पढ़ने में कितना समय ख़र्च करता है. ये जानना चाहते हैं काठमांडू नेपाल से जगदीश खनल. ठीक-ठीक कहना तो मुश्किल है लेकिन औसतन हम अपना एक तिहाई जीवन सोने में बिता देते हैं. जहाँ तक खाने का सवाल है यह आपकी आदत और ज़रूरत पर निर्भर करता है लेकिन औसतन एक घंटा रोज़. पढ़ाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि कौन कितना पढ़ता है इसलिए इसका औसत निकालना मुश्किल है. |
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