शनिवार, 26 अप्रैल, 2008 को 11:26 GMT तक के समाचार
ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
बीबीसी संवाददाता, लंदन
हँसने में, हमारी कितनी मांसपेशियां काम करती हैं. ये सवाल किया है बाराशॉकर से अमित ने.
मंद-मंद हँसी यानी मुस्कुराहट तो व्यक्तित्व में ख़ुशमिज़ाजी लाती ही है, अनेक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज़ोर-ज़ोर से हँसना भी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. जब हम हँसते हैं तो हमारे चेहरे की कई मांसपेशियां इसमें क्रियाशील होती हैं, हमारी भंवे चढ़ती हैं, हमारे कान हिलते हैं, आंखे मिचती हैं, नथुनें फूलते हैं, ऊपर का होंठ फैलता है, नीचे का होंठ हिलता है, ठोड़ी हिलती है, गाल पीछे होते हैं... कुल मिलाकर हमारे चेहरे की 53 मांसपेशियों का हँसने में कुछ न कुछ योगदान रहता है. हँसने में चेहरे की ही नहीं बल्कि जबड़े, गले, पेट और डाएफ़्राम की माँसपेशियाँ भी काम करती हैं. और अगर बहुत ज़ोर ज़ोर से हँसा जाए तो शायद शरीर की और माँसपेशियाँ भी क्रियाशील हो जाती होंगी.
लिहोडा, गांधीनगर गुजरात से किरित जे पटेल ने पूछा है कि ब्लैकबैरी फ़ोन क्या होता है और किस तरह काम करता है.
ब्लैकबैरी एक नई तकनीक है जिसे आप मोबाइल फ़ोन की तरह तो इस्तेमाल कर ही सकते हैं साथ ही उस पर अपने ईमेल, वेब पेज और इंटरनेट भी देख सकते हैं. यह सामान्य मोबाइल फ़ोन से कुछ बड़ा होता है. बड़ी-बड़ी कंपनियाँ इसका इस्तेमाल करती हैं जिससे उसमें काम करने वाले कर्मचारी और अधिकारी 24 घंटे कम्पनी के इंट्रानेट से जुड़े रह सकें. यह उपकरण काफ़ी सुरक्षित होता है इसलिए कंपनी का डाटा कोई बाहरी आदमी नहीं पढ़ सकता है. यह कंपनी के इनबॉक्स सर्वर से जुड़ा होता है जिसके ज़रिए कंपनी के लोग कंपनी के वेब पेज और ईमेल देख सकते हैं और उनका जवाब भी दे सकते हैं. इसमें कंप्यूटर की तरह टाइप करने की भी सुविधा होती है.
नेत्रहीनों के लिए लिखना पढ़ना किसने संभव किया. पूछते हैं ग्राम हरिपुर, अररिया बिहार के मोहम्मद अनज़ार हुसैन.
नेत्रहीनों के लिए लिखने पढ़ने की प्रणाली को ब्रेल कहते हैं जिसे फ़्रांस के लुई ब्रेल ने 1821 में तैयार किया था. इसके पीछे भी एक कहानी है. फ़्रांस के शासक नेपोलियन ने एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की मांग की जिसे सैनिक चुपचाप अंधेरे में भी इस्तेमाल कर सकें. चार्ल्स बार्बिए ने एक प्रणाली तैयार की लेकिन वह सैनिकों के लिए बहुत जटिल थी. उसके बाद नेपोलियन, पेरिस में नेत्रहीनों के राष्ट्रीय संस्थान गए जहाँ उनकी लुई ब्रेल से मुलाक़ात हुई. ब्रेल ने बार्बिए की प्रणाली का दोष पकड़ लिया और उसमें सुधार करके ब्रेल प्रणाली तैयार की जो नेत्रहीनों के लिए क्रांतिकारी साबित हुई.
जापान के लोग क्या हिमालय को सागरमाथा कहते हैं. ये सवाल किया है उज्जैन मध्यप्रदेश से पवन मालवे ने.
जी नहीं. सगरमाथा नाम नेपाली भाषा का है जो ऐवरेस्ट शिखर को दिया गया है. इसका अर्थ है आकाश का मस्तक. तिब्बत में इसे चोमोलुंग्मा कहा जाता है जिसका अर्थ है ब्रह्मांड की माँ.
बाटा शू कंपनी के संस्थापक कौन थे. पूछते हैं लंदन से संदीप.
बाटा शू कंपनी की स्थापना 1894 में तोहमहश बाहत्याह ने ज़्लिन में की थी जो अब चैक रिपब्लिक का शहर है. अगर इनका नाम रोमन लिपि में लिखा जाए तो टॉमस बाटा पढ़ा जाएगा. शायद इसीलिए दुनिया भर में यह बाटा के नाम से मशहूर हुआ. टॉमस बाटा के परिवार में कई पीढ़ियों से जूते बनाने का काम होता था. लेकिन जब पहला विश्व युद्ध छिड़ा तो सेना को भारी संख्या में जूतों की ज़रूरत पड़ी. बाटा ने इस ज़रूरत को समझा और औद्योगिक स्तर पर जूते बनाने का काम शुरू किया. इस कंपनी का मुख्यालय अब स्विट्ज़रलैंड के लौज़ैन शहर में है, 26 देशों में जूते बनाने की फ़ैक्टरियाँ हैं और 50 से भी अधिक देशों में इसके जूतों की दुकानें हैं.
अब एक सवाल क्रिकेट का. ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन ने कितने तिहरे शतक लगाए थे. यह पूछा है सेड़िया सांचौर से तुलसाराम पटीर ने.
जहाँ तक टेस्ट क्रिकेट का सवाल है सर डॉन ब्रैडमैन ने दो बार तिहरे शतक लगाए. दोनों ऐशिस श्रंखला के दौरान लगाए गए और दोनों लीड्स के हैडिंगले मैदान पर. पहली बार सन 1930 में जब उन्होंने 334 रन बनाए और दूसरी बार 1934 में जब उन्होंने 304 रन जोड़े.