|
जलवायु पर प्रस्ताव अमरीका को नामंज़ूर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का कहना है कि वह जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों में कटौती के लिए जी-8 सम्मेलन में किसी भी साझा प्रस्ताव पर सहमत नहीं होगा. अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा है कि वह ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के किसी भी बाध्यकारी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा. हालांकि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वह ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं जिसमें हर देश के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित करने की बात हो. औद्योगिक देशों के समूह का यह सम्मेलन जर्मनी में हो रहा है. ऐसा लगता है कि अपने इस रुख़ से अमरीकी राष्ट्रपति बुश और उनके सलाहकारों ने जर्मनी की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है कि सम्मेलन में ग्रीन हाउस गैसों को लेकर कोई सहमति बन सकती है. हालांकि अमरीका का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर सहमति बन रही है. राष्ट्रपति बुश के सुरक्षा सलाहकार स्टीफ़न हेडली का कहना है कि सहमति से इस बात पर विचार किया जा सकता है कि इस समस्या से निपटने के लिए एक साझा उपाय की ज़रूरत है, क्योंकि क्योटो संधि पाँच साल बाद ख़त्म हो जाएगी. जर्मनी की चाँसलर एंगेला मर्केल के साथ दोपहर के भोजन के दौरान जॉर्ज बुश ने कहा, "मैं यहाँ इस इच्छा के साथ आया हूँ कि क्योटो के बाद की संधि पर आपके साथ मिलकर काम किया जा सके." उन्होंने कहा, "हमें देखना होगा कि हम ग्रीनहाउस गैसों में किस तरह से कटौती कर सकते हैं और ऊर्जा के क्षेत्र में हम किस तरह आत्मनिर्भर हो सकते हैं." लेकिन यह वो लक्ष्य नहीं है जिसकी उम्मीद अमरीका से की जा रही है. अमरीका से वादे की उम्मीद की जा रही है कि इस सदी के मध्य तक वह ग्रीनहाउस गैसों में 50 प्रतिशत तक की कटौती कर लेगा. ब्रिटेन, जर्मनी और ज़्यादातर यूरोप का मानना है कि यह एक अहम बिंदू है. चांसलर एंगेला मर्केल ने हालांकि अपनी बात इस तरह से रखी जिससे यह न झलकता हो कि राष्ट्रपति बुश से उनके मतभेद हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में कोई सहमति ज़रूर बनेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें पिघलती बर्फ़ है सबसे ज्वलंत मुद्दा05 जून, 2007 | विज्ञान गैस सोखने की क्षमता ख़तरे में17 मई, 2007 | विज्ञान चीन के सामने पर्यावरण की कठिन चुनौती08 मई, 2007 | विज्ञान 'जलवायु मुद्दे पर तत्काल उपाय कारगर'04 मई, 2007 | विज्ञान वन संपदा का भविष्य आशाजनक14 नवंबर, 2006 | विज्ञान 'तीन डिग्री बढ़ सकता है तापमान'16 अप्रैल, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||