|
टेरी शाइवो ने अंतिम साँस ली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गंभीर रूप से बीमार अमरीकी महिला टेरी शाइवो ने भोजन नली हटाए जाने के 13 दिन बाद आख़िरकार दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनके माता-पिता के प्रवक्ता ने गुरूवार को कहा कि फ़्लोरिडा के अस्पताल में बीमार पड़ीं शाइवो की मौत हो गई है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने टेरी के माता-पिता, बॉब व मैरी शिंडलर के प्रति संवेदना प्रकट की है और कहा है कि वे जीवन की संस्कृति में विश्वास रखते हैं. टेरी की मृत्यु के 15 मिनट पहले तक शिंडलर दंपति और उनके दो अन्य बच्चे कमरे में थे मगर फिर टेरी के पति माइकल शाइवो ने उनसे बाहर जाने के लिए कहा. टेरी की मौत के बाद उनको फिर से कमरे में वापस आने दिया गया. टेरी शाइवो को जीवित रखने के लिए उनके माता-पिता के अभियान में साथ देनेवाले फ़ादर फ़्रैंक पावोन ने आरोप लगाया कि टेरी के पति निर्दयी हैं. उन्होंने कहा,"ये केवल मृत्यु नहीं है, ये हत्या है. और हमें दुःख है कि हमारे देश ने ऐसे अत्याचार को होने दिया". विवाद
टेरी शाइवो 15 साल पहले गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं जिससे उनके मष्तिष्क पर गंभीर असर पड़ा था और तबसे ही वे कृत्रिम उपायों के सहारे जीवित थीं. टेरी के पति माइकल शाइवो का कहना था कि उनकी पत्नी इस तरह से जीवित नहीं रहना चाहतीं और इसके लिए उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था. इसके बाद फ़्लोरिडा की एक अदालत ने 16 मार्च को माइकल की याचिका पर फ़ैसला सुनाया जिसके बाद 18 मार्च को टेरी की भोजन नली हटा ली गई. मगर टेरी शाइवो के माता-पिता ने अपनी बेटी को बचाने के लिए काफ़ी प्रयास किए थे और इस मामले ने अमरीका समेत पूरी दुनिया में बहस छेड़ दी थी. टेरी के माता-पिता ने अपनी 41 वर्षीया बेटी को को फिर से कृत्रिम उपायों के ज़रिए भोजन दिए जाने के लिए कई अदालतों के चक्कर काटे मगर उन्हें हर जगह निराशा हाथ लगी. बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि टेरी शाइवो के मामले ने अमरीका में जनमत को बाँट दिया है और लगता नहीं कि टेरी की मृत्यु से ये मामला ठंढा पड़ जाएगा. प्रतिक्रिया अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश ने भी टेरी शाइवो को जीवित रखने का पक्ष लिया था. उन्होंने तथा रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाली अमरीकी कांग्रेस ने इस संबंध में क़ानून में बदलाव तक किए ताकि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सके. मगर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था.
बुश ने शाइवो की मौत के बाद कहा है कि टेरी के माता-पिता के समर्थकों को अपने जज़्बे को बनाए रखना चाहिए. बुश ने कहा कि ऐसी कठिन परिस्थितियों में सदा जीवन के पक्ष में रहना चाहिए और जो शक्तिशाली हैं ये उनका कर्तव्य है कि वह निर्बल की रक्षा करे. रोमन कैथोलिक चर्च ने भी टेरी शाइवो की इस तरह से मृत्यु की निंदा की है. बुश ने कहा,"सभ्यता की मूल भावना ये है कि जो बलवान हैं वह निर्बलों की रक्षा करें. और जहाँ भी संदेह की स्थिति हो वहाँ जीवन की प्रकल्पना की जानी चाहिए". अदालत
1990 से जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही टेरी शाइवो को मौत दिए जाने की अर्ज़ी सबसे पहले 1998 के मई महीने में उनके पति ने डाली. पति माइकल शाइवो का कहना था कि टेरी को ऐसी स्थिति में और जीवित नहीं रखना चाहिए. फ़रवरी 2000 में एक न्यायाधीश ने उनकी अर्ज़ी मान ली मगर कहा कि तत्काल उनकी भोजन नली नहीं हटाई जानी चाहिए. मगर टेरी के माँ-बाप चाहते थे कि टेरी को किसी भी तरह से जीवित रखा जाए और इसके बाद उन्होंने भी अदालत की शरण ली और 2001 में फ़ैसले पर स्थगन आदेश हासिल किया. मामल सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा मगर उसने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया जिसके बाद 24 अप्रैल 2001 को टेरी की भोजन नली हटा ली गई. लेकिन दो दिन बाद ही अदालत ने फिर से भोजन नली लगाने के आदेश दिए. इसके बाद ये क़ानूनी लड़ाई जारी रही और इस वर्ष 16 मार्च को फ़्लोरिडा की एक अदालत के आदेश के बाद 18 मार्च को उनकी भोजन नली हटा ली गई. टेरी के माता-पिता अपनी अपील लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट गए मगर उसने एक बार फिर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. आख़िरकार 31 मार्च 2005 को टेरी शाइवो ने दुनिया को अलविदा कह दिया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||