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एड्स को रोकने के तरीक़े पर बहस

थाईलैंड में हो रहे अंतरराष्ट्रीय एड्स सम्मेलन में इस बात को लेकर तीखी बहस हो रही है कि एड्स को रोकने का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या है.

यूरोपीय आयोग के विकास आयुक्त पॉल नील्सन ने अमरीका और युगांडा की ओर से रखे गए इस विचार को अमानवीय बताया है कि संयम बरतना कॉन्डोम के इस्तेमाल से बेहतर तरीक़ा है.

आयुक्त नील्सन ने कहा कि एड्स से निपटने के लिए संयम को ही एकमात्र तरीक़े के तौर पर पेश करना अमानवीय और ज़मीनी सच्चाई से कहीं परे की बात है.

इससे पहले युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने सम्मेलन में कहा था कि एड्स की समस्या का अंतिम समाधान कॉन्डोम नहीं हैं.

मुसेवेनी ने सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रतिनिधियों को बताया कि उनके देश ने युवाओं को विवाह से पहले यौन संबंध नहीं बनाने के लिए राज़ी करके एचआईवी-एड्स के विरुद्ध संघर्ष में अच्छी प्रगति की है.

मगर नील्सन ने कहा कि युगांडा में एचआईवी-एड्स के मामलों में आई क़मी की वजह कॉन्डोम ही हैं.

यानी नील्सन का ये संदेश युगांडा के राष्ट्रपति के संदेश से कहीं उल्टा था.

विवादास्पद रुख़

राष्ट्रपति मुसेवेनी ने कहा कि युगांडा में उन्होंने जिस आक्रामक तरीक़े से संयम का अभियान चलाया उसका फ़ायदा उनके देश को मिला है. साथ ही उनके देश में दक्षिण अफ़्रीकी देशों में कॉन्डोम का इस्तेमाल सबसे कम होता है.

मगर निश्चित रूप से उनका रुख़ विवादास्पद तो है ही शायद यही वजह थी कि युगांडा के एड्स आयोग के प्रमुख डेविड एपुले ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति कॉन्डोम के इस्तेमाल की बात पूरी तरह ख़ारिज नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने राष्ट्रपति की बात को समझाते हुए कहा कि ग्रामीण इलाक़ों में तो लोगों को ये भी समझाना होगा कि कॉन्डोम का सही तरीक़े से इस्तेमाल कैसे किया जाए. उनके अनुसार कई बार तो गाँवों के माहौल में कॉन्डोम के इस्तेमाल की परिस्थितियाँ ही नहीं बन सकतीं.

एपुले के अनुसार ये याद रखना होगा कि कई बार तो गाँवों में घरों में बिजली ही नहीं होती कि रात में कॉन्डोम खोजा जाए.

इसीलिए उनका कहना था कि कॉन्डोम के इस्तेमाल को बढ़ावा तो दिया जाए मगर ये भी याद रखा जाए कि इससे जुड़ी कुछ परेशानियाँ भी हैं.

कुछ ऐसी संस्थाएँ जो कॉन्डोम के इस्तेमाल को ख़ारिज करती हैं उन्हें अमरीका से समर्थन मिलता रहा है.

इंटरनेशनल प्लान्ड पैरेंटहुड फ़ेडरेशन के स्टीव सिंडिंग को इस बात की चिंता है कि कॉन्डोम का विरोध करने वाले संगठनों की बात अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश सुनते हैं.

तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है? जी फ़र्क पड़ता है और वो ये कि अमरीका ही एचआईवी-एड्स से निपटने के लिए सबसे ज़्यादा पैसा देता है.

इस अभियान से जुड़े लोगों की शिकायत है कि कॉन्डोम के इस्तेमाल का विरोध करने वालों को बड़ी राशि देने से एड्स को रोकने के अभियान में लगे दूसरे लोगों के प्रयासों को धक्का लगता है.