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इतिहास सिर्फ़ राजाओं और बादशाहों की हार-जीत का नहीं होता. इतिहास उन छोटी-बड़ी वस्तुओं से भी बनता है जो अपने समय से जुड़ी होती
हैं और समय गुज़र जाने के बाद ख़ुद इतिहास बन जाती हैं.
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शोएब पाकिस्तानी हैं और वहाँ की जनता को संबोधित करने का उन्हें हक है, लेकिन संबोधन में दुनियाभर के मुसलमानों को शामिल करने
की क्या ज़रूरत थी.
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जगजीत से मेरी दोस्ती की उम्र उतनी ही है जितनी कि मेरी ग़ज़ल, 'दुनिया जिसे कहते हैं, बच्चों का खिलौना है. मिल जाए तो मिट्टी
है खो जाए तो सोना' का.
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निदा साहेब मानते हैं कि ग़ालिब और फ़िराक़ ने अपनी कमजोरियों से शायरी को नुक़सान नहीं पहुँचाया. फिराक़ की यही हुनरमंदी उनके
बड़े होने की अलामत है.
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