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होली ही है जो मनाई नहीं जाती खेली जाती है. इस बार होली खेलने आपके साथ हैं हास्य कवि अशोक चक्रधर लेकर आए हैं कई रंगों में सराबोर
व्यंग्य के नाज़ुक गुब्बारे....ज़रा संभलकर...
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कुमाऊँ के लोगों का कहना है कि बरसाने की होली के बाद अगर कोई होली है तो वह उनकी. कई दिन पहले से ही इसकी धूमधाम शुरू हो जाती
है.
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पश्चिम बंगाल में होली दोल उत्सव के तौर पर मनाई जाती है. लेकिन शांति निकेतन में मनने वाली होली की तो बात ही कुछ अलग है.
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होली पर नज़ीर अकबराबादी ने भी अपनी कलम चलाई. उन्होंने लिखा-मुँह लाल गुलाबी आँखें हों, और हाथों में पिचकारी हो, तो देख बहारें
होली की.
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