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कथित रुप से वैश्विक और आधुनिक हो गए समाज की विडंबनाओं को उजागर करती उदय प्रकाश की पुस्तक 'मोहन दास' का एक अंश. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूसी क्रांति ने कई बुद्धिजीवियों को उद्वेलित किया. मक्सिम गोर्की भी उन्हीं में से एक थे. उस क्रांति पर गोर्की की पुस्तक माँ, आज सौ साल बाद भी लोकप्रिय है. | पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह से रामबहादुर ने लंबी बात की. इस बातचीत को एक पुस्तकाकार प्रकाशित किया गया है. इसमें कई अहम सवालों के जवाब हैं. | ब्रिटेन में हिंदी की अस्मिता बनाए रखने के लिए कब क्या प्रयत्न हुए हैं- इस बारे में कोई लिखित जानकारी नहीं थी. उषाराजे सक्सेना ने इसे साकार किया है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||