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 मंटो के पचास बरस बाद
बुधवार, 11 मई, 2005 को 10:39 GMT तक के समाचार
 
मंटो का मकान 
 
सिर्फ़ 42 वर्ष जीने वाले मंटो साहित्य पर अमिट छाप छोड़ गए. उन्होंने इंसानियत के हर उस पहलू को अपना विषय बनाया जिसे कागज़ पर उतारने की हिम्मत किसी और ने नहीं दिखाई.
 
 
 
 
किताब 
 
 
मंटोमैं क्या लिखता हूँ?
मंटो की ज़बानी सुनिए कि उन्हें कैसी कहानी और कैसे पात्र पसंद थे.
मंटोमैं क्यों लिखता हूँ?
सआदत हसन मंटो बता रहे हैं कि वे अफ़साना कैसे और क्यों लिखते हैं.
राजेंद्र यादवक्यों पढ़ें मंटो को
राजेंद्र यादव कहते हैं क्योंकि मंटो सबसे प्रामाणिक कथाकार थे.
 
 
मंटो 
 
उर्दू के प्रतिष्ठित लेखक और आलोचक गोपीचंद नारंग का मानना है कि मंटो पैदाइशी किस्सागो और मास्टर स्टोरीटेलर थे.
 
 
दंगा 
 
विभाजन, दंगा और बलवा मंटो की कहानियों के केंद्र में रहा है. इन विषयों पर उनकी लघु कहानियों का कोई जोड़ नहीं है. कुछ लघु कहानियाँ.
 
 
नीरज कुमार 'आयुश' 
 
सआदत हसन मंटो के न जाने कितने पाठक हैं और हर किसी के लिए मंटो एक अलग मंटो हैं. एक आम पाठक की नज़र में क्या हैं मंटो?
 
नासिरा शर्मानारी को इंसान माना
नासिरा शर्मा मानती हैं कि मंटो ने महिलाओं को मानवीय दृष्टि से देखा.
मंटोसुकून की तलाश में
बैरिस्टर के बेटे से लेखक होने तक मंटो का सफ़र भी बेहद दिलचस्प है.
बॉर्डरटोबा टेक सिंह
विभाजन की त्रासदी पर सआदत हसन मंटो की एक लोमहर्षक कहानी.
 

 
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