पुरुषों की 'शिकारी' नज़र

  • 17 सितंबर 2012
रंगों की विशेषताएं आंकने में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा सक्षम होती हैं.

अगर आप पार्लर से अपने बालों पर लाल रंग चढ़वा कर एक नए अवतार में बाहर निकलें और बाहर जाते ही आपका ब्वॉयफ्रेंड आपके बालों की बजाय आपकी कानों की बालियों की तारीफ करे, तो गुस्सा न करें.

इसका मतलब ये नहीं है कि आपका ब्वॉयफ्रेंड लापरवाह है या वो आपके खूबसूरत लगने की कोशिश को नज़रअंदाज़ कर रहा है.

दरअसल चूंकि वो एक पुरुष है, तो अनायास ही उसकी नज़र हिलती हुई चीज़ों पर जाती है और ऐसा एक शोध में साबित किया गया है.

अमरीका के ब्रुकलिन कॉलेज में हुए एक शोध में सामने आया है कि पुरुषों की नज़रें उन चीज़ों पर ज़्यादा केंद्रित होती हैं, जिनमें हरकत हो रही हो जबकि महिलाओं की नज़रें रंगों को परखने में ज़्यादा तेज़ होती हैं.

ब्रुकलिन कॉलेज के मनोविज्ञान विषय के प्रॉफेसर आईसैक अब्रामॉव ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए दो अलग-अलग शोध व सर्वेक्षण किए.

एक सर्वेक्षण में उन्होंने लोगों को एक रंग के कई सैंपल दिए और उनसे उन रंगों का एक ही शब्दावली में वर्णन करने को कहा.

पारखी नज़र

सर्वेक्षण में उन्होंने पाया कि महिलाओं के विपरीत पुरुष उन रंगों का अलग-अलग शब्दों में वर्णन कर रहे थे.

आईसैक अब्रामॉव ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “महिलाएं और पुरुष दोनों ही नीले रंग को नीले की तरह ही देखते हैं लेकिन उनमें कितना हिस्सा लाल रंग का है इसे महिलाएं और पुरुष अलग-अलग तरीके से आंकते हैं.”

शोध के मुताबिक महिलाएं रंगों की विशेषताएं आंकने में पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा सक्षम होती हैं.

आप भले ही इसे एक मज़ाक समझें, लेकिन घर में किस रंग के सोफ़े के साथ किस रंग के कुशन जँचेंगें, ये महिला से बेहतर पुरुष नहीं आंक सकते.

जहां तक पुरुषों की बात है, तो उनकी नज़रें हर चीज़ की बारीक़ी पर जाती हैं. उदाहरण के तौर पर अगर दूर क्षितिज पर कोई हवाई जहाज़ एक बिंदु जितना भी छोटा दिख रहा हो, पुरुषों की नज़रें उसे पहचान सकती हैं.

अब्रामॉव का कहना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पुरुष अपनी भूमिका एक शिकारी से जोड़ कर देखते हैं जो कि अपने शिकार को दूर से ही पहचान लेता है, जबकि महिलाएं अपने प्रदर्शन को सामाजिक मानकों से जोड़ कर देखती हैं.

महिलाओं और पुरुषों का ये व्यवहार उद्विकास के सिद्धांत से जुड़ा है क्योंकि पुरुषों का उद्विकास शिकारी की पारंपरिक भूमिका से हुआ जहाँ वे दूर से ही शिकार को पहचानकर घात लगाते थे. तो वहीं महिलाएँ शिकार से जुटाए आहार को संभाल कर रखने में निपुण थीं.

संबंधित समाचार