बिना बाप के सांप

  • 12 सितंबर 2012
'कुंआरी' मां सांपिन अपने बच्चे के साथ. '

अमरीका में शोधकर्ताओं ने पहली बार 'आज़ाद' कुंआरी सांपो को अंडे देते हुए पाया है.

इससे पहले भी कैद में रखे गए कुछ मादा सांपो, छिपकलियों, पक्षियों और शार्कों को जन्म देते हुए देखा गया है.

लेकिन ये पहली बार है जब प्राकृतिक अवस्था में मादा सांपों को बिना नर साथी के साथ मिलन के मां बनते हुए पाया गया है.

अमरीका में शोधकर्ताओं ने सांपो की दो प्रजातियों की गर्भवती मादाओं की जांच की और उनके एक साथ पैदा हुए बच्चों का आनुवांशिक परीक्षण किया.

शोध

वैज्ञानिकों ने उत्तरी अमरीका के सांप पिट वाइपर की दो प्रजातियों - कॉपरहेड और कॉटनमाउथ का परीक्षण किया.

उन्होंने इन सांपो की गर्भवती मादाओं को उन जगहों से पकड़ा जहां नर-जाति का सांप भी मौजूद थे.

इन मादाओं ने बच्चे जने और वैज्ञानिकों ने फिर नवजात सर्पों की आनुवांशिक जांच की.

कॉपरहेड के 22 नवजातों में से एक मादा शिशु को शोधकर्ताओं ने पाया कि उसका जन्म बिना पुरुष शुक्राणु के हुआ था.

वहीं कॉटनमाउथ सांप के 37 बच्चों में एक कुआंरा जन्म था.

पार्थेनोजेनिसिस

दरअसल 'वर्जिन बर्थ' या 'कुंआरा जन्म' उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें स्त्रीबीज बिना पुरुश शुक्राणु से मिले गर्भाधन करता है.

इस प्रक्रिया को जीव विज्ञान की भाषा में 'पार्थेनोजेनिसिस' कहते हैं.

पार्थेनोजेनिसिस में नवजात सिशु में सिर्फ मां के आनुवांशिक गुण मौजूद रहते हैं और पिता की जरूरत नहीं रहती है.

इस शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर बूथ ने कहा जिस आवृति से ये घटना हुई है वो चौंकाने वाला है.

कॉटनमाउथ पिट वाइपर पर भी शोध किया गया

उन्होंने कहा, "इसकी आवृति ने हमें सकते में ला दिया है. नतीजों के अनुसार ढाई फीसदी से पांच फीसदी जन्म पार्थेनोजेनिसिस से हुआ होगा. ये असाधारण नतीजा है क्योंकि इस तरह के जन्मों को अब तक विकास के क्रम में विलक्षण या अद्भुत ही माना जाता रहा है."

दुर्लभ

प्रोफेसर बूथ कहते हैं कि इस प्रक्रिया को अब दुर्लभ नहीं माना जाना चाहिए.

शोध में अभी ये पता नहीं चला है कि मादा सांपो ने खुद इस तरह जन्म देने की प्रक्रिया को चुना या फिर किसी संक्रमण से ऐसा हुआ है.

शोधकर्ता अब ये देखना चाहते हैं कि ऐसे कुंआरे बच्चे जब व्यस्क होते हैं तो वो बच्चा पैदा कर पाते हैं या नहीं.

अगर वो ऐसा कर पाते हैं तो ये विज्ञान में नया रास्ता खोल देगा.

(आपके सुझाए शीर्षकों में फेसबुक पर ये शीर्षक सुझाया था संदीप कुमार महतो ने)

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