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पुलिस बना रही है समलैंगिकों को निशाना

 बुधवार, 12 सितंबर, 2012 को 08:34 IST तक के समाचार
इराक़ में गे पार्टी

इराक़ में समलैंगिकों को निशाना बनाए जाने की घटना पिछले कुछ महीनों में बढ़ती जा रही है.

इराक़ में सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के कुछ वर्षो में सैंकड़ों समलैंगिक पुरुषों और महिलाओं को निशाना बनाकर मार डाला गया है.

हालांकि कितने लोगों को निशाना बनाया गया है या फिर वास्तव में कितने लोग मारे गए हैं इस बारे में दावे के साथ कुछ भी कहना मुश्किल है लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की पुष्टि की है कि वो इराक़ में चलाए जा रहे समलैंगिक विरोधी अभियान को लेकर काफ़ी चिंतित है.

बग़दाद स्थित संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि समलैंगिकों के ख़िलाफ़ जारी हिंसा को रोकने में असमर्थ रहने के कारण इराक़ी सरकार भी इस अपराध में शामिल है और ऐसा करके इराक़ अतंरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन कर रहा है.

इराक़ में समलैंगिकों का कहना है कि उनकी जान को ना केवल हथियारबंद अतिवादी समूहों से ख़तरा है बल्कि पुलिस भी उनको निशाना बना रही है और उनके मुताबिक़ इराक़ी सरकार इन सबको जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है.

सरकार भी 'शामिल'

समलैंगिकों को इराक़ी समाज में अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता है और इस कारण समलैंगिक जोड़े ख़ौफ़ और गुमनामी का जीवन गुज़ारते हैं, इसलिए ये साबित करना बहुत मुश्किल है कि उनके ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान में सरकारी अधिकारी किस हद तक शामिल हैं.

लेकिन इतना ज़रूर है कि बीबीसी ने अपनी जांच के दौरान जिन 17 समलैंगिक पुरूषों से बातचीत की थी उन सभी ने लगभग एक जैसी बातें कहीं थीं.

वे सभी पुलिस से छिपकर रह रहे थे और हाल ही में उन सभी का कोई ना कोई जोड़ीदार, साथी या परिचित मारा गया था.

उन सभी लोगों का कहना था कि समलैंगिकों की गिरफ़्तारी लगातार हो रही है.

इराक़ में समलैंगिकता को क़ानूनी वैधता हासिल है लेकिन बावजूद इसके एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें समलैंगिक जोड़ों को गिरफ़्तार करने के आदेश दिए गए थे.

एक दूसरे समलैंगिक व्यक्ति ने कहा कि उसकी आंखों के सामने उसके जोड़ीदार को पुलिस लॉक अप में पीट-पीट कर मार डाला गया था.

पुलिस वालों को रिश्वत देकर जेल से बाहर आने वाले कुछ समलैंगिकों ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पुलिस ने उन्हें दूसरे समलैंगिक साथियों का नाम और पता बताने के लिए मजबूर किया.

बीबीसी की लगातार कोशिश के बावजूद इराक़ के आंतरिक मंत्रालय ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया लेकिन एक सरकारी प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया कि इस तरह की कोई चीज़ हो रही है.

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार पूरे इराक़ में 10 या 20 समलैंगिक जोड़े हैं और अगर कोई पुलिस अधिकारी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए समलैंगिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है तो वो निजी तौर पर ऐसा कर रहा है.

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