इस्लाम को 'कैंसर' बताती फिल्म का विरोध

  • 12 सितंबर 2012

कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने वाली एक इस्लाम-विरोधी फिल्म के इंटरनेट पर जारी होने के बाद, लीबिया और मिस्र में स्थित अमरीकी दूतावासों पर हमले हुए हैं जिनमें अमरीकी विभाग के एक अधिकारी की मौत हो गई है और एक अधिकारी घायल हुआ है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक 'इनोसेन्स ऑफ मुस्लिम्स' नाम की ये फिल्म कैलिफोर्निया में रहने वाले 52 वर्षीय इसराइली-अमरीकी मूल के सैम बेसिल ने बनाई है. फिल्म में इस्लाम धर्म को 'कैंसर' बताया गया है.

फिल्म के कुछ अंश अरबी भाषा में डब करके यू-ट्यूब वेबसाइट पर डाले गए हैं. फिल्म में एक अभिनेता पैगंबर मोहम्मद का किरदार निभा रहा है. इस्लाम धर्म में किसी भी चित्र या किरदार के माध्यम से पैगंबर को चित्रित नहीं किया जा सकता.

लीबिया के बेनग़ाज़ी में हथियारबंद लोगों ने अमरीकी वाणिज्य दूतावास में घुसकर आग लगा दी थी, जबकि मिस्र के क़ाहिरा में प्रदर्शनकारियों ने दूतावास में लगे अमरीकी झंडे को फाड़ दिया और उसकी जगह इस्लामी झंडे लगा दिए थे.

पश्चिमी निशाने पर

दोनों दूतावासों में हुई हिंसा के बाद अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "कुछ लोगों ने इस हिंसा को इंटरनेट पर फैली कुछ आपत्तिजनक सामग्री पर प्रतिक्रिया कहकर सही ठहराने की कोशिश की है. लेकिन मैं ये स्पष्ट करना चाहती हूं कि ऐसी हिंसा को किसी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता."

क्लिंटन ने साथ ही कहा कि अमरीका किसी धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश की भी घोर निंदा करता है.

फिल्म के निर्माता का कहना है कि ये फिल्म इस्लाम धर्म के 'दोगलेपन' को सामने लाती है.

एएफपी समाचार एजेंसी के मुताबिक अमरीकी पादरी टेरी जोन्स इस फिल्म को लोकप्रिय बनाने का काम देख रहे हैं.

इससे पहले जोन्स के कुरान की प्रतियां जलाने और न्यूयॉर्क के ग्राउंड ज़ीरो में मस्जिद बनाने का विरोध करने पर तीखी आलोचना हुई थी.

ये हमले मंगलवार को हुए, जिस दिन न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर वर्ष 2001 में हुए हमलों की बरसी थी.

बेनगाज़ी को इस्लामी चरमपंथियों का गढ़ माना जाता है और पिछले महीनों में वहां हिंसा की वारदातें बढ़ीं हैं.

लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ भड़के प्रदर्शनों के गढ़ बेनगाज़ी में पश्चिमी देशों की सेना और सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया है.