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इराक़: सिलसिलेवार हमलों में 92 की मौत

 सोमवार, 10 सितंबर, 2012 को 04:25 IST तक के समाचार
इराक़

इराक़ में रविवार दिन से जारी हुए सिलसिलेवार बम धमाकों और बंदूक के हमलों में अब तक 92 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 350 से अधिक घायल हुए हैं. मुल्क में दिन भर में कम से कम इस तरह के 20 हमले हुए हैं.

ये हमले उस अदालती फैसले के बाद शुरू हुए हैं जिसमें उप राष्ट्रपति तारिक़ अल-हाशिमी को सुरक्षाबलों और शिया समुदाय के लोगों की मौत के लिए फांसी की सज़ा सुनाई गई है.

अदालत ने कहा है कि वो शियाओं और सुरक्षाबलों को मरवाने के लिए एक दस्ता चलाया करते थे.

हमलों में सबसे अधिक क्षति राजधानी बग़दाद में पहुंची है जहां शहर के बाहरी इलाकों में कार बमों का इस्तेमाल किया गया.

ये इलाक़े शिया समुदाय के बाहुल्य वाले हैं.

हालांकि अबतक ये साफ़ नहीं हो पाया है कि इन हमलों में किनका हाथ है. पहले हुए इसी तरह के हमलों के लिए प्रशासन ने अल-क़ायदा के जुड़े लोगों को ज़िम्मेदार बताया था.

रविवार को बग़दाद के अलावा दक्षिणी पूर्वी शहर अमारा को भी निशाना बनाया गया जहां कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है जबकि 60 घायल हैं.

किरकूक, बसरा, बकुबा, नसीरिया, देजैल भी कार बमों और दूसरी तरह के हमलों का शिकार हुए.

अल हाशेमी

इराक की एक अदालत ने देश के भगौड़े उप राष्ट्रपति तारिक अल हाशेमी को फांसी की सजा सुनाई है.

अल हाशेमी को फांसी

रविवार को इराक़ की एक अदालत ने देश के भगोड़े उप राष्ट्रपति तारिक अल हाशेमी को फांसी की सजा सुनाई थी

अदालत ने उन्हें लोगों की हत्या करने वाला एक ऐसा दस्ता चलाने का दोषी पाया जो शिया मुसलमानों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाता था.

सुन्नी संप्रदाय से संबंध रखने वाले अल हाशेमी इसी साल की शुरुआत में देश छोड़ कर चले गए थे और अभी तुर्की में निर्वासन में रह रहे हैं.

इस मामले में देश की शिया, सुन्नियों और कुर्दों की गठबंधन सरकार में एक राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है.

इराक की शिया सरकार में हाशेमी सुन्नी संप्रदाय के सबसे वरिष्ठ नेता थे. पिछले साल दिसंबर में उन पर आरोप लगाए गए थे.

इराक सरकार ने 19 दिसंबर 2011 को उनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी किए थे. उससे एक दिन पहले ही अमरीकी सेना देश छोड़ कर गई थी.

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