BBC navigation

खनन की भेंट चढ़ा एक शहर

 रविवार, 2 सितंबर, 2012 को 17:39 IST तक के समाचार
स्वीडन के किरुना शहर का चर्च

किरुना के चर्च को गिरा कर फिर उसका एक-एक तख्ता इकट्ठा करके चर्च को दोबारा बनाया जाएगा.

आर्कटिक में एक बड़ी परियोजना के तहत एक शहर को उसकी मौजूदा जगह से हटाने की प्रक्रिया चल रही है. ये है स्वीडन के सुदूर उत्तर में किरुना नाम का शहर जो यूरोप की सबसे बड़ी लौह अयस्क खदान पर बसा है.

इस शहर में 18 हज़ार लोग रहते हैं जिनमें से कुछ खानाबदोश सामी समुदाय के चरवाहे हैं जो रेंडियर पालते हैं.

बीबीसी संवाददाता जो फ़िजन के मुताबिक शहर के विस्थापन में सभी इमारतें हटाई जाएंगी. इसमें, एक समय स्वीडन की सबसे पसंदीदा इमारत चुना गया किरुना का चर्च भी शामिल है. जल्द ही इसे गिरा दिया जाएगा और फिर कुछ किलोमीटर दूर, इसका एक-एक तख्ता इकट्ठा करके चर्च को दोबारा बनाया जाएगा.

शहर की एक ख़ास सड़क पर अगर आखिर तक जाएं तो आप लोहे की खदान के सबसे गहरे हिस्से तक पहुंच जाएंगे.

स्वीडन की सरकारी खनन कंपनी एलकेएबी में काम करने वाली ओवा सिवेर्स्टन बताती हैं कि शहर की एक सड़क खदान के अंदर चार सौ किलोमीटर तक जाती है.

लौह अयस्क की बढ़ती मांग

एलकेएबी के खनन गतिविधियां बढ़ाने की वजह ओवा बताती हैं, "क्योंकि आज दुनिया में लौह अयस्क की भारी मांग है इसलिए हमें अपने कस्टमर्स को बेचने के लिए और लोहा ढूंढना होगा. हम ज़्यादातर यूरोप को लोहा बेचते हैं लेकिन चीन से भी लौह अयस्क की मांग बढ़ रही है और इसलिए हम यूरोप और मध्यपूर्व को और ज़्यादा लोहा बेच रहे हैं."

लोहे की बढ़ती मांग को देखते हुए एक पूरे शहर के हटाकर दोबारा बसाने के खर्च को ओवा सही मानती हैं.

"आज दुनिया में लौह अयस्क की भारी मांग है इसलिए हमें और लोहा ढूंढना होगा. एक पूरे शहर को हटाना सुनने में ये अजीब और पागलपन लगता है लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए ये खर्चा सही है."

ओवा सिरर्वेस्टन, कर्मचारी, एलकेएबी खनन कंपनी

वे कहती हैं, "सुनने में ये अजीब और पागलपन लगता है लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए ये खर्चा सही है. हमें पक्का नहीं पता लेकिन शायद इसमें लगभग 12 अरब स्वीडिश क्राउन या लगभग दो अरब अमरीकी डॉलर का खर्चा आए जो लगभग हमारे सालाना मुनाफ़े के बराबर है."

किरुना को विस्थापित करने की प्रक्रिया में तीन हज़ार तक अपार्टमेंट और साथ ही ऑफ़िस, स्कूल और अस्पताल हटाए जाएंगे. लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब किरुना का विस्थापन हो रहा है.

विस्थापन का इतिहास

स्थानीय इतिहासकार पीटर स्टेनबर्ग ने बताया,"हम जिस लकड़ी के केबिन के बाहर खड़े हैं उसे बी वन कहते हैं क्योंकि इस इलाके में बनने वाली ये पहली इमारत है. ये वर्ष 1890 में बनी थी जिस साल एलकेएबी कंपनी की स्थापना हुई. ये शहर बसा ही इसलिए था क्योंकि यहां लौह अयस्क की खदान है. इसके अलावा यहां बसने की कोई और वजह नहीं है. आप यहां कुछ पैदा नहीं कर सकते क्योंकि यहां बहुत ठंड पड़ती है."

पीटर आगे बताते हैं, "किरुना के आज के विस्थापन में कुछ नया नहीं है क्योंकि साठ और सत्तर के दशक में भी शहर का एक हिस्सा हटाया गया था जिसकी वहज से खदान के विस्तार में दिक्कत आ रही थी.मुझे भी आठ-दस साल में यहां से जाना पड़ेगा. मैं इसे स्वीकार करता हूं क्योंकि अगर ये खदान यहां न हो तो यहां और कुछ नहीं है."

लंबी अवधि में किरुना के विस्थापन का ज़्यादा असर सामी समुदाय की खानाबदोश जीवनशैली पर पड़ेगा.

सामी लोग स्कैंडिनेविया क्षेत्र के शुरुआती बाशिंदे हैं और ये पारंपरिक तौर पर रेंडियरों के चरवाहे हैं.

खानाबदोश जीवनशैली प्रभावित

"सामी समुदाय लंबे समय से यहां है. और अयस्क हमेशा तो नहीं रहेगा, कभी-न-कभी तो ये ख़त्म होगा ही. लेकिन अगर तब तक आप हमारी आजीविका ख़त्म कर देंगे तो ये तो अच्छा नहीं होगा."

ऐंडर्स कारश्टेड, सामी समुदाय

ऐंडर्स कारश्टेड सामी समुदाय के हैं. वे कहते हैं, "शहर की ज़्यादातर आबादी स्वीडिश है और मुझे लगता है कि हमारा काम उनके लिए रोड़ा है. लेकिन सामी समुदाय के लिए रेंडियरों को चराना हमारी संस्कृति है, हमारी आजीविका है, हमारा सब कुछ है."

ऐंडर्स को चिंता है कि शहर में सड़कों की दिशा बदलने से चरागाहों की ज़मीन कम हो जाएगी और उनकी खानाबदोश जीवनशैली पर भी इसका असर पड़ेगा. वे कहते हैं, "अपने मवेशियों के साथ एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए अब ज़्यादा इलाके नहीं बचे हैं. इसलिए अगर ये लोग ग़लत जगह सड़क बनाएंगे तो हमें रेंडियरों को ट्रक में लाद कर सर्दी के चरागाह ले जाना पड़ेगा या फिर उस इलाके में रेंडियर चराना बंद करना पड़ेगा."

ऐंडर्स कहते हैं कि अगर ऐसा होता है तो ये उनके समुदाय के लिए बहुत बुरा होगा. उन्होंने बताया, "देखिए, हम लंबे समय से यहां के निवासी हैं. और अयस्क हमेशा तो नहीं रहेगा, कभी-न-कभी तो ये ख़त्म होगा ही. लेकिन अगर तब तक आप हमारी आजीविका ख़त्म कर देंगे तो ये तो अच्छा नहीं होगा."

किरूना के विस्थापन का काम जारी है और रेंडियरों के लिए एक पुल भी बन गया है. इस शहर को यहां से हटाने में बीस साल या फिर उससे भी ज़्यादा समय लगेगा और इस बीच खनन का काम जारी रहेगा.

इस बीच अगर और भी लौह अयस्क का पता चल जाता है तो क्या पता कि किरूना का फिर से हटाकर कहीं और बसाना पड़े.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.