पहला फ़लस्तीनी बैले डांसर

 रविवार, 26 अगस्त, 2012 को 13:26 IST तक के समाचार
अयमान सफीहा

अयमान का शौक फ़लस्तीनियों साथियों को समझ में नहीं आता था

वो जब कमर पीछे खींचकर अपना एक पैर उठाकर सधे हाथों की सीध में लाते हैं तो उनके माथे पर पसीने की बूंदे छलक आती हैं जो बताती हैं कि वो कुशल बैले नर्तक हैं.

वो लंदन के एक स्टूडियों में आइनों के सामने रोज़ दो घंटे बैले का अभ्यास करते हैं और इसी के बूते वो शो के दौरान अपने देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

उनका नाम अयमान सफीहा है, उम्र 21 वर्ष और खास बात ये है कि वे पहले फलस्तीनी पुरुष बैले-डांसर हैं.

लगन

लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी राह आसान नहीं थी.

"मेरे माता-पिता को पता था कि बैले मेरे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बनने वाला है. यहां तक कि मेरे दादा ने भी इसे मेरे करियर के तौर पर स्वीकार कर लिया जबकि उन्हें इसकी अच्छी समझ नहीं है"

अयमान

अयमान बताते हैं, ''बैले सीखने की मेरी इच्छा, मेरे साथ पढ़ने वालों की समझ से एकदम परे थी. उनकी नज़र में ये लड़कियों का काम है. मैं उनके बीच ऐसा था, मानों किसी दूसरे ग्रह से आया हूं.''

इसराइल के अरब नागरिक अयमान का जन्म गेलिली के कफ्र यासिफ में हुआ जो अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए विख्यात है जहां मेहमूद दरवेश जैसे जानेमाने लेखक के साथ ही कई अन्य कलाकारों का जन्म हुआ है.

यहां अरबों और यहूदियों के बीच संबंध मधुर रहे हैं. अयमान खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उनका संबंध एक उदारवादी परिवार से है जहां नये विचारों का स्वागत किया जाता है.

अयमान बताते हैं, ''मेरे माता-पिता को पता था कि बैले मेरे जीवन का एक बड़ा हिस्सा बनने वाला है. यहां तक कि मेरे दादा ने भी इसे मेरे करियर के तौर पर स्वीकार कर लिया जबकि उन्हें इसकी अच्छी समझ नहीं है.''

विरोध और मुश्किलें

अयमान के कुछ अरब साथी उनकी इस पसंद का विरोध करते हैं, लेकिन उनके विरोध की बुनियाद मज़हब है.

अयमान, राबिया मुर्कुस डांस स्टुडियो से स्नातक है. 'मिक्स्ड' डांस-स्कूल और बैले कंपनियों के प्रति इसराइली सरकार के रुख़ में बदलाव, अयमान के लिए एक चुनौती है.

वे बताते हैं, ''जब येहुदित अरनोन ने किबुत्ज़ डांस स्कूल की स्थापना की, जहां मैंने पढ़ाई की, तब विचार ये था कि अरबों और यहूदियों को एक-दूसरे के करीब लाया जाए. लेकिन अब समय बदल गया है और स्कूल फलस्तीनियों को लेने का इच्छुक नहीं है.''

अयमान का कहना है कि इसराइल में कला पहले की तुलना में कहीं ज्यादा अलग-थलग पड़ गई है.

वे कहते हैं, ''लेकिन मैं कला जगत में रहते हुए राजनीति पसंद नहीं करता. मैं बस नाचना चाहता हूं.''

तो वो इस वक़्त नाच रहे हैं.

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