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सीरिया असद के इस्तीफे पर चर्चा को तैयार

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 00:58 IST तक के समाचार
सीरिया

सीरिया में पिछले साल मार्च से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं

सीरिया के उप प्रधानमंत्री क़ादरी जमील से कहा है कि सीरिया सरकार राष्ट्रपति बशर अल असद के सत्ता से हटने पर चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस वार्ता के लिए राष्ट्रपति के इस्तीफे की पूर्व शर्त नही होनी चाहिए.

मास्को के दौरे पर आए सीरियाई उप प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिमी देशों की मंशा सीरिया पर सैन्य कार्रवाई करने की है.

संवाददाता सम्मेलन में क़ादरी जमील ने चेतावनी देते हुए कहा कि सीरिया पर सीधी सैन्य कार्रवाई असंभव है

इधर, रूस ने सीरिया में किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है.

रूस का ये बयान ऐसे समय आया है जब अमरीका ने कहा है कि अगर सीरिया विद्रोहियों के ख़िलाफ़ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो वो सैनिक दखल दे सकता है.

रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोफ़ ने कहा कि सीरिया में कोई भी बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्ती से पालन करना चाहिए.

सोमवार को अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि रासायनिक हथियारों की तैनाती अमरीका के लिए 'लाल रेखा' की तरह है.

इस बीच ऐसी रिपोर्टें हैं कि सीरियाई सेना ने राजधानी दमिश्क के एक उपनगरीय इलाके मुआदमियाँ में धावा बोला है.

दावा

लावरोफ़ की खरी-खरी

लावरोफ़

आज की स्थिति में सिर्फ यही एक सही रास्ता है. सिर्फ़ सुरक्षा परिषद ही सीरिया के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति दे सकता है.

विपक्षी आंदोलनकारियों का दावा है कि इस कार्रवाई में 23 लोग मारे गए हैं. इसके अलावा कई घरों और दूकानों में आग लगा दी गई है.

मंगलवार को रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ ने चीन के शीर्ष राजनयिक दाई बिन्गुओ और सीरिया के एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल से मॉस्को में मुलाकात की.

इस बैठक में सीरिया के संघर्ष पर चर्चा हुई, जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अभी तक 18 हजार लोगों की मौत हो चुकी है.

दाई के साथ मुलाकात के बाद लावरोफ़ ने कहा कि रूस और चीन का राजनयिक सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्घांतों का पालन करने और उसके उल्लंघन की अनुमति न देने पर आधारित रहता है. उन्होंने कहा, "आज की स्थिति में सिर्फ यही एक सही रास्ता है."

लावरोफ़ ने कहा कि सिर्फ़ सुरक्षा परिषद ही सीरिया के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति दे सकता है. उन्होंने बमों के सहारे लोकतंत्र थोपने के खिलाफ चेतावनी दी.

रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ ने सीरिया के उप प्रधानमंत्री क़ादरी जमील से कहा कि वे उनकी योजना भी जानना चाहते हैं जिसके तहत राजनीतिक बातचीत हो और जिसमें बिना किसी बाहरी दखल के सीरियाई लोगों को अपना भविष्य तय करने का अधिकार मिले.

दूसरी ओर क़ादरी जमील ने कहा कि सीरियाई लोगों के खुद से अपनी समस्याओं के समाधान करने की कोशिशें बाहरी दखल के कारण प्रभावित हो रही हैं.

वर्ष 2011 मार्च से सीरिया में सरकारी विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे. उस समय से ही रूस और चीन सीरिया में दखल का विरोध करते रहे हैं.

इन दोनों देशों ने सुरक्षा परिषद में सीरिया के खिलाफ तीन प्रस्तावों को वीटो भी किया है.

चेतावनी

ओबामा

ओबामा ने सीरिया को कड़ी चेतावनी दी है

सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक संवाददाता सम्मेलन में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर सीरिया को कड़ी चेतावनी दी थी.

उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो इसके गंभीर नतीजे होंगे.

बराक ओबामा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्होंने सैनिकों के दखल का आदेश नहीं दिया है, लेकिन अमरीका वहाँ की स्थिति की निगरानी कर रहा है और उसके पास आपात योजना भी है.

जुलाई में सीरिया की सरकार ने यह माना था कि उनके पास रासायनिक और जैविक हथियार हैं और किसी बाहरी आक्रमण की स्थिति में वो इनका इस्तेमाल कर सकता है.

हालाँकि सीरिया ने ये भी स्पष्ट किया था कि वो सीरियाई संकट के दौरान इनका इस्तेमाल नहीं करेगा, चाहे आंतरिक प्रगति जैसी भी हो.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि अमरीका में इस बात को लेकर भी चिंता है कि कहीं सीरिया के रासायनिक हथियार गलत हाथों में न पड़ जाएँ.

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