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जब छात्रों ने किया स्कूल पर क़ब्ज़ा

 शुक्रवार, 17 अगस्त, 2012 को 17:52 IST तक के समाचार
स्कूल पर छात्रों का क़ब्ज़ा

लातिन अमरीकी देश चिली में पुलिस ने राजधानी सेंटियागो स्थित तीन स्कूलों पर क़ब्ज़ा करने वाले 139 लोगों को पकड़ा है जिनमें ज़्यादातर किशोर उम्र के छात्र हैं.

स्कूल की इमारतों में पुलिस के दाखिल होने पर छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं. स्कूल पर छात्रों का क़ब्ज़ा चिली सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा है.

छात्र देश में नि:शुल्क और बेहतर शिक्षा की मांग कर रहे हैं. सेंटियागो स्थित बीबीसी संवाददाता गिडियोन लांग के मुताबिक, सरकार की ये कार्रवाई विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ चिली सरकार के कड़े होते रुख़ का संकेत देती है.

कार्रवाई की भर्त्सना

विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्र नेता के तौर पर उभरी कैमिला वालेजो ने सरकार की इस कार्रवाई की भर्त्सना की है.

कैमिला का कहना है, ''ये सार्वजनिक शिक्षा और चिली में असमानता खत्म करने की कोशिशों पर सीधा हमला है.''

राष्ट्रपति पिनेरा एक स्कूल में बच्चों के साथ

प्रदर्शनों से राष्ट्रपति पिनेरा की लोकप्रियता कम हुई

स्कूलों पर छात्रों का क़ब्ज़ा खत्म कराने पहुंची पुलिस पर छात्रों ने पथराव किया. इन छात्रों ने माध्यमिक स्तर के तीन स्कूलों पर कई दिनों से अपना नियंत्रण कर रखा था.

अन्य स्कूलों पर अभी भी छात्रों का क़ब्ज़ा है.

'बल प्रयोग ज़रूरी था'

पुलिस प्रमुख विक्टर टापिया ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को सही बताया है.

उन्होंने कहा, ''कानून-व्यवस्था के लिए बल प्रयोग ज़रूरी था.''

चिली सरकार के प्रवक्ता आंद्रेज़ चेडविक का कहना है कि वे स्कूलों को छात्रों से मुक्त कराने के लिए सेंटियागो मेयर के इस आदेश का समर्थन करते हैं.

चेडविक का कहना है, ''स्कूलों पर क़ब्ज़ा जमाने वाले छात्रों के हिंसा पर उतरने को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. इन छात्रों का एकमात्र उद्देश्य कक्षाओं और सामान्य जीवन को बाधित करना है.''

शिक्षा में सुधार की मुहिम

"स्कूलों पर क़ब्ज़ा जमाने वाले छात्रों के हिंसा पर उतरने को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. इन छात्रों का एकमात्र उद्देश्य कक्षाओं और सामान्य जीवन को बाधित करना है"

आंद्रेज़ चेडविक, चिली सरकार के प्रवक्ता

चिली में वर्ष 1990 में लोकतंत्र की वापसी के बाद शिक्षा में सुधार के लिए देश में हुए विरोध-प्रदर्शनों में ये सबसे बड़ा आंदोलन है.

छात्रों का कहना है कि लातिन अमरीका में आमतौर पर सबसे बेहतर मानी जाने वाली चिली की शिक्षा-पद्धति बड़ी पक्षपातपूर्ण है.

उनका कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों को लातिन अमरीका के कुछ बेहतरीन स्कूलों में दाखिला मिल जाता है, लेकिन गरीब छात्रों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना पड़ता है जहां व्यवस्था सही नहीं है.

चिली में 20 वर्षों में पहले कंज़रवेटिव नेता और देश के राष्ट्रपति सेबिसटियन पिनेरा ने शिक्षा-पद्धति में सुधार के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से इस वर्ष की शुरुआत में कर सुधारों की घोषणा की थी.

लेकिन छात्र प्रदर्शनों के चरम पर पहुंचने से उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है.

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