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यौन शोषण से बचाव: 'महिलाओं' के खाड़ी जाने पर प्रतिबंध

 गुरुवार, 9 अगस्त, 2012 को 18:18 IST तक के समाचार
फाइल फोटो

नेपाल से हर साल हजारों महिलाएं काम की तलाश में खाड़ी देशों में जाती हैं

नेपाल में सरकार का कहना है कि वो 30 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के खाड़ी देशों में जाकर काम करने पर प्रतिबंध लगा रही है.

नेपाल की सरकार ने ये कदम तब उठाया है जब खाड़ी देशों में काम करने वाली महिलाओं के शोषण पर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.

खाड़ी देशों में काम करने वाली कई महिलाओं ने शिकायत की है कि वहां उनके साथ शारीरिक और यौन दुर्व्यवहार हुआ है. उन्हें खराब स्थितियों में रखा जाता है और वेतन भी नहीं दिया जाता है.

युवती के साथ कुवैत में दुर्व्यवहार

नेपाल की सरकार ने खाड़ी देशों में महिलाओं के काम करने पर 12 वर्ष से प्रतिबंध लगा रखा था जिसे 18 महीने पहले ही खत्म किया गया था.

"हम खाड़ी देशों में घरेलू काम करने वाली नेपाल की कई महिलाओं से मिले हैं जिनके साथ न केवल उनके मालिक ने बलात्कार किया बल्कि अपने रिश्तेदारों के साथ भी यौन संबंध बनाने के लिए उन्हें विवश किया"

विश्वा खड़का

सरकार ने ये प्रतिबंध तब लगाया था जब एक युवती के साथ कुवैत में दुर्व्यवहार किया गया था जिसकी वजह से उसने आत्महत्या कर ली थी. इस मामले की वजह से नेपाल के लोग आक्रोशित थे.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक, नेपाल से हर साल हजारों महिलाएं काम की तलाश में खाड़ी देशों में जाती हैं. इनकी उम्र आमतौर पर 25 वर्ष से कम होती है.

नेपाली कैबिनेट का फैसला

नेपाल के अंग्रेजी दैनिक हिमालयन टाइम्स ने देश के सूचना मंत्री राज किशोर यादव के हवाले से खबर दी है, ''खाड़ी देशों में महिलाओं का यौन और मानसिक शोषण होने की खबरें आती रही हैं. इसलिए कैबिनेट ने तय किया है कि खाड़ी देशों में काम के लिए जाने वाली महिलाओं की उम्र निर्धारित कर दी जाए. तीस वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं के साथ शोषण होने की संभावना कम होती है.''

नेपाली महिलाओं की विदेशों में तस्करी रोकने की दिशा में काम करने वाले समूह 'मैती नेपाल' ने सरकार की इस घोषणा का स्वागत किया है.

'मैती नेपाल' की निदेशक विश्वा खड़का का कहना है, ''हम खाड़ी देशों में घरेलू काम करने वाली नेपाल की कई महिलाओं से मिले हैं जिनके साथ न केवल उनके मालिक ने बलात्कार किया बल्कि अपने रिश्तेदारों के साथ भी यौन संबंध बनाने के लिए उन्हें विवश किया. उन्हें घरों में बंद करके रखा गया और उनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता है.''

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