ऑस्ट्रेलिया में 'मिनी' भारत

 बुधवार, 22 अगस्त, 2012 को 11:29 IST तक के समाचार
भारतीय

ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई भारतीय कहते हैं कि एक दिन वे भारत लौट जाएँगे

ऑस्ट्रेलिया में बाहर से आकर बसने वालो में भारतीयों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. भारत ने इस मामले में चीन और ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया है.

लेकिन क्या उपमहाद्वीप से आने वाले ये प्रशिक्षित प्रवासी अपनी जन्मभूमि यानी भारत के आकर्षण को दरकिनार कर सकते हैं?

ऑस्ट्रेलिया की जीवन शैली दुनिया की सबसे अच्छी जीवन शैलियों में से एक है और ज्यादातर छात्र इसी के प्रति आकर्षित होते हैं और एक दूसरे देश को अपनाकर वहाँ फल फूल रहे हैं.

ताज़ा आकड़े बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में 29,000 भारतीय प्रशिक्षित पेशेवर हैं जिनमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर और रसोइए शामिल हैं और वो यहां आकर स्थायी निवासी बन जाते हैं.

वर्ष 2011-2012 की प्रवासी परियोजना रिपोर्ट की अनुसार ऐसे लोग ऑस्ट्रेलिया पहुँचने वाले विदेशियों के 15 प्रतिशत से अधिक हैं.

अनूठा भारत

लेकिन घर की याद, जाने पहचाने घरों और चेहरों की इच्छा यहां बसने वाले नए और पुराने लोगों के लिए परेशान करने वाला हो सकता है.

मेलबर्न यूनिवर्सिटी के ऑस्ट्रेलिया-भारत संस्थान में कश्मीरी मूल के प्रोफेसर अमिताभ मट्टू का कहना है, '' भारतीयों के बारे में कुछ तो अनूठा है. हालांकि वहाँ परिस्थितियां मुश्किल हैं और भले ही आप कहीं और काम करना चाहते हैं लेकिन भारतीय संस्कृति और भारत में आपके आस-पास रह रहे लोगों का प्यार आपको वापस खींचता रहता है.''

ऑस्ट्रेलिया के हिंदू परिषद के रमन भल्ला वर्ष 2000 में बेहतर करियर और बेहतरीन जीवन शैली की चाह लिए यहां आए थे.

अब वे सफलता पूर्वक नौकरी कर रहे हैं और अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं.

"भारत छोड़कर यहां बसने के लिए मुझे अपराधबोध होता है. हालांकि मैं अभी भी भारत के लिए योगदान कर सकता हूं और मैं उम्मीद करता हूं कि एक दिन मैं वापस जा पाऊंगा"

रमन भल्ला

वे स्वीकार करते हैं कि जब उनके बच्चे बड़े हो जाएंगे तो उनके लिए अपने देश वापस लौट कर व्यापार करने के सपने को छोड़ना मुश्किल होगा.

रमन भल्ला का कहना है, '' मैं खुद को पहले एक ऑस्ट्रेलियन कहता हूं लेकिन अभी भी मेरा भारतीय संस्कृति से नाता है.''

कसूरवार

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, '' भारत छोड़कर यहां बसने के लिए मुझे अपराधबोध होता है. हालांकि मैं अभी भी भारत के लिए योगदान कर सकता हूं और मैं उम्मीद करता हूं कि एक दिन मैं वापस जा पाऊंगा.''

रमन भल्ला का कहना था,'' भारत की संस्कृति, उसके लोग उसे एक आकर्षक देश बनाते हैं और मैं कभी उन भावनाओं से दूर नहीं हो सकता.''

ये स्पष्ट है कि कई प्रवासी भारतीय कभी स्वदेश नहीं लौटेंगे.

यहां इन लोगों की तादाद बढ़ रही है और ये लोग आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. मेलबर्न और सिडनी में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों के बाद नस्ली हमलों को लेकर जो चिंताएँ इन्हें घेरने लगी थीं उनमें भी अब कमी आई है.

सांस्कृतिक मूल्य

एना तिवारी एक फिल्म निर्माता हैं जो अपने ऑस्टेलियाई मूल के पति के साथ रहने के लिए अमरीका से सिडनी आकर रहने लग गई हैं.

उनका कहना है, ''भारत में तेजी से आर्थिक प्रगति हो रही है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती. भारत की गति की तुलना में पश्चिमी देश ठहरे हुए से दिखते हैं.''

"कहते हैं कि 'आप एक भारतीय को भारत से बाहर भेज सकते हैं लेकिन किसी भारतीय के भीतर से भारत को बाहर नहीं निकाला जा सकता', ये बात एक हद तक सच लगती है और इसलिए लोग वापस वहाँ लौटना चाहते हैं जहाँ वो पले बढ़े"

रुचिर पंजाबी

एना का कहना था, ''मैं कई देशों में रही चुकी हूं इसलिए मुझमें भारत लौटने की इच्छा नहीं होती लेकिन मैं वहां हर साल कुछ महीने बिताना चाहती हूँ. वहां इतना कुछ सीखा और किया जा सकता है जो कोई और देश नहीं दे सकता. लेकिन मैं पिछले छह सालों से ऑस्ट्रेलिया मैं रह रही हूं और अब यहां से भावनात्मक तौर जुडा़व महसूस करती हूँ.''

जहां कुछ प्रवासी अपनी जड़े गहरी जमाने की कोशिश कर रहे हैं तो कुछ लोग तेज़ी से उभरते हुए भारत में अपनी किस्मत अजमाने के लिए जाना चाहते हैं.

रूचिर पंजाबी एक वेबसाइट उद्यमी हैं. 25 साल के रुचिर के दफ़्तर सिडनी और बंगलौर में हैं.

उनका कहना है, ''भारत विकास के शीर्ष पर है जिसकी वजह से लोग उसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं.''

वे एक पुरानी बात दोहराते हैं, "कहते हैं कि 'आप एक भारतीय को भारत से बाहर भेज सकते हैं लेकिन किसी भारतीय के भीतर से भारत को बाहर नहीं निकाला जा सकता', ये बात एक हद तक सच लगती है और इसलिए लोग वापस वहाँ लौटना चाहते हैं जहाँ वो पले बढ़े."

जब उनसे पूछा गया कि वे वापस कब लौटेंगे तो रुचिर का कहना था, '' इसकी संभावना है और जल्द ही ऐसा हो सकता है.''

प्रोफेसर मट्टू का मानना है कि दोनों राष्ट्रों से लोगों का आना-जाना अभी और बढ़ेगा क्योंकि उनके सांस्कृति मूल्य एक जैसे हैं.

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