
पाकिस्तान में कुल आबादी का पांच प्रतिशत से कम हिस्सा धार्मिक अल्पसंख्यक है
पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासतौर पर हिंदुओं के साथ होने वाले भेदभाव पर अमरीका ने चिंता जताते हुए उनके खिलाफ हिंसा के मामलों के उदाहरण भी सामने रखे हैं.
अमरीकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान में हिंदुओं को अपहरण और जबरन धर्म-परिवर्तन का डर लगा रहता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को मुस्लिम बहुल आबादी की हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ता है.
हिंदू लड़कियों का अपहरण
पाकिस्तान में कुल आबादी का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा धार्मिक अल्पसंख्यकों में गिना जाता है जिनमें हिंदू भी शामिल हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, ''धार्मिक अल्पसंख्यकों का दावा है कि जबरन धर्म-परिवर्तन रोकने के लिए सरकारी कार्रवाई नाकाफी है.''
"पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद और पाकिस्तान हिंदू परिषद के मुताबिक हिंदु समुदाय की 20-25 लड़कियां हर महीने अगवा की जाती हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कुबूल करने के लिए कहा जाता है"
अमरीकी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, ''पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद और पाकिस्तान हिंदू परिषद का कहना है कि हिंदु समुदाय की 20-25 लड़कियां हर महीने अगवा की जाती हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कुबूल करने के लिए कहा जाता है.''
अमरीकी विदेश विभाग ने एक उदाहरण दिया है जिसमें बताया गया है कि बीते साल नौ नवम्बर को चार हिंदू डॉक्टरों की सिंध सूबे के शिकारपुर जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
कहा जाता है कि ये हमला एक हिंदू मर्द और मुस्लिम औरत के बीच नाजायज संबंध की वजह से हुआ था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले की पड़ताल एक साल से लंबित है.
बांग्लादेश का मामला
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में भी अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव किया जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ''हिंदू, ईसाई और बौद्ध धर्म को मानने वाले अल्पसंख्यकों को मुस्लिम बहुल इलाकों में भेदभाव का शिकार होना पड़ता है. कभी-कभी उनके साथ हिंसा भी होती है.''
"बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध धर्म को मानने वाले अल्पसंख्यकों को मुस्लिम बहुल इलाकों में भेदभाव का शिकार होना पड़ता है. कभी-कभी उनके साथ हिंसा भी होती है"
अमरीकी रिपोर्ट
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव और हिंसा के मामले पिछले वर्ष की तुलना में कम हो रहे हैं.
बांग्लादेश में कई हिंदुओं को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ा है क्योंकि एक सम्पत्ति कानून की वजह से वे अपने अपनी सम्पत्ति पर दावा नहीं कर सकते हैं.
हालांकि अवामी लीग सरकार ने वर्ष 2001 में इस कानून को हटा दिया था लेकिन बाद में आई सरकार ने इसे दोबारा लागू कर दिया था.
ढाका विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के अध्ययन का हवाला देते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कानून की बुनियाद पर बांग्लादेश की सरकार ने लगभग 26 लाख एकड़ जमीन हथिया ली है जिससे देश के तमाम हिंदुओं पर असर पड़ा है.









