साइप्रस को ग्रीस की तरह आर्थिक मदद की उम्मीद

 शुक्रवार, 29 जून, 2012 को 06:59 IST तक के समाचार
निकोसिया

राजधानी निकोसिया में रोजाना लोगों को काम से निकाला जा रहा है

यूरोजोन देशों की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की बहस में स्पेन पर तो सबकी नजर जा रही है लेकिन इस बीच साइप्रस पर निगाह नही जा रही है. ये वो देश है जिस पर यूरोपीय संघ की ब्रसेल्स की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई.

साइप्रस की राजधानी निकोसिया की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर खुद को किस्मत वाले मानते हैं कि उनके पास काम है.

एक नौकरी के लिए सैकड़ों आवेदन आते हैं और मांग भी लगभग 40 फीसदी गिर गई है. उपभोक्ता भी समय पर पैसे चुकाने में नाकामयाब हो रहे हैं.

इस फर्म के मालिक पानौस प्रोटोपापास कहते हैं कि उनका काम निकोसिया की अर्थव्यवस्था की हालत का एक सटीक उदाहरण है.

पानोस कहते हैं, "मुझे डर है कि हम जल्दी ही सोचना पड़ेगा की काम जारी रखने के लिए हमें लोगों को निकलना पड़ेगा. आजकल व्यापार चलाने के लिए नौकरी करनी पड़ रही है. हम हर रोज इस तरह की कहानियां सुन रहे हैं."

बैंक खस्ताहाल

साइप्रस के एक बड़े बैंक लाइकी बैंक के वित्त प्रमुख मिखाइलिस सारिस है जो देश के वित्त मंत्री भी रह चुके है.

"साइप्रस टैक्स की चोरी के लिए अच्छी जगह है. रूस के कई धनी उद्योगपति यहां पैसा लगाते हैं और यहां से यूक्रेन ले जाते हैं. यूक्रेन का सबसे बड़ा निवेशक साइप्रस ही है. आप इसे हवाला तो नहीं कह सकते क्योंकि यह यहां एक संवेदनशील मामला है लेकिन अगर आप रूसी पैसों से काम कर कर रहे हैं मतलब आप खतरों से खेल रहे हैं"

प्रोफ़ेसर ह्यूबर्ट फॉस्टमैन

उनसे पूछने पर कि गलती कहां हुई, उन्होंने कहा, "बैंक का आर्थिक आधार मज़बूत है, हमें फायदा भी होता है लेकिन इसके बावजूद बैंक अरबों डॉलर की आर्थिक मदद की मांग कर रहा है क्योंकि हेयरकट यानी बाजार में हमारी कीमत पर की गई कटौती की वजह से हम इस स्थिति में है."

सारिस कहते हैं कि साइप्रस की बैंकों को ग्रीस की बैंको की तरह ही जो पूंजी देश से बाहर गई ती उसे वापस लाने की कोशिश करनी चाहिए थी. लेकिन सारिस कहते हैं कि सरकार ने गड़बड़ कर दी.

वहीं देश के मौजूदा वित्त मंत्री वासोस शियारली साइप्रस की वित्तीय संकट का दोष एक दूसरी देश पर मढ़ते हैं. शियारली कहते हैं कि साइप्रस का ये संकट ग्रीस की आर्थिक संकट की वजह से आया है.

साइप्रस की बैंको को आर्थिक पैकेज की जरूरत है और ये मदद उन्हें एक हफ्ते के भीतर चाहिए. लेकिन वो कर्ज यूरोपीय संघ से लेना चाहेंगे या फिर चीन या रूस जैसे देशों से ये भी बड़ा सवाल है.

शियारली कहते हैं, "हम किसी से भी पैसा ले सकते हैं. जहां भी उन्हें बेहतर नियम और शर्तें मिलेगी वो वहीं से कर्ज लेंगे."

दरअसल साइप्रस से रूस का संबंध यहां से बाहर ज्यादा लोगों को पता नहीं होगा.

रूस का प्रभाव

साइप्रस के बैंकों को आर्थिक मदद की उम्मीद है

लेकिन अगर आप तटीय शहर लिमासोल आए जो साइप्रस का सबसे बड़ा शहर भी है तो आप गलती से समझ बैठेंगे की आप रूस में हैं. सड़कों पर रूसी भाषा, रेस्तरां में रूसी खाना, रूसी नाइटक्लब और 35 डिग्री की गर्मी में भी ऐसी दुकानें दिख जाएंगी जो फर के कोट बेच रहे हैं. रूस ने साइप्रस को ढाई अरब यूरो की मदद देकर वहां आर्थिक महासंकट को आने से कुछ दिनों के लिए रोक दिया है.

लेकिन निकोसिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ह्यूबर्ट फॉस्टमैन कहते की रूसी पैसे की एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.

वो कहते हैं, "साइप्रस टैक्स की चोरी के लिए अच्छी जगह है. रूस के कई धनी उद्योगपति यहां पैसा लगाते हैं और यहां से यूक्रेन ले जाते हैं. यूक्रेन का सबसे बड़ा निवेशक साइप्रस ही है. आप इसे हवाला तो नहीं कह सकते क्योंकि यह यहां एक संवेदनशील मामला है लेकिन अगर आप रूसी पैसों से काम कर कर रहे हैं मतलब आप खतरों से खेल रहे हैं."

साइप्रस को आर्थिक मदद यूरोपीय संघ से मिले चाहे रूस से, यहीं की सड़कों पर लोगों को चिंता है कि उनकी जीवनशैली बदल जाएगी और वो भी 800 किलोमीटर दूर स्थित ग्रीस को देखकर चिंता कर रहे हैं.

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