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इला भट्ट मेरे आदर्शों में से एक: हिलेरी

 रविवार, 24 जून, 2012 को 04:37 IST तक के समाचार
हिलेरी क्लिंटन (बीच में) और इला भट्ट (दाएं)

हिलेरी क्लिंटन इला भट्ट से तब मिलीं जब वो अमरीकी राष्ट्रपति की पत्नी के तौर पर भारत आई थीं. (तस्वीर साभार:सेवा वेबसाइट)

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन कहती हैं कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें वे अपना आदर्श मानती हैं.

वॉशिंगटन में नेशनल पार्टनरशिप फॉर वीमेन एंड फैमिलीज़ के समारोह हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि दुनिया भर के बहुत से पुरुष और महिलाएं मेरे 'हीरो' और 'हीरोइन' हैं जिनमें से एक इला भट्ट भी हैं.

क्लिंटन ने भारत में सेल्फ़ इंप्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन यानी सेवा नाम की संस्था शुरू करने में इला भट्ट की भूमिका का ज़िक्र किया.

क्लिंटन ने कहा, "इला भट्ट एक काफी पढ़ी-लिखी महिला हैं जिनके पास अपनी योग्यता के मुताबिक कई विकल्प थे. लेकिन उन्होंने अपना जीवन सबसे ग़रीब तबके के लोगों का जीवन व्यवस्थित करने को समर्पित कर दिया. ऐसी महिलाएं जो खेतों में काम करती हैं, सब्ज़ी बेचती हैं, घरों में काम करती हैं, जो अपना और अपने परिवार का भरण पोषण के लिए जद्दोजहद करती हैं और जिन्हें हमेशा सबसे कम अहमियत दी जाती हैं."

मुलाकात

"इला भट्ट एक काफी पढ़ी-लिखी महिला हैं जिनके पास अपनी योग्यता के मुताबिक कई विकल्प थे. लेकिन उन्होंने अपना जीवन सबसे ग़रीब तबके के लोगों का जीवन व्यवस्थित करने को समर्पित कर दिया."

हिलेरी क्लिंटन

उन्होंने बताया कि वो पहली बार इला भट्ट से तब मिलीं जब वे अमरीकी राष्ट्रपति की पत्नी के तौर पर भारत आई थीं.

उन्होंने कहा, "फिर जब मैं बतौर अमरीकी विदेश मंत्री भारत आई, तब मैं फिर से सेवा संस्था की सदस्यों से मिली. इस बार मुझे पता चला कि संस्था की सदस्यता 10 लाख से ज़्यादा हो गई है, उसकी नेता के लिए चुनाव हुए हैं, और इन लोगों ने जो कुछ हासिल किया है, उससे दुनिया के बाकी हिस्सों में लोगों ने सीख ली है."

दक्षिण अफ़्रीका के केपटाउन शहर में इला भट्ट की संस्था (सेवा) पर आधारित कुछ हाउसिंग योजनाओं के दौरे को याद करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "मैंने देखा कि सबसे ग़रीब तबके की औरतों ने सेवा के बारे में सुनने के बाद अपने लिए ज़मीन जुटा कर गांव बनाना शुरू किया."

क्लिंटन ने आगे कहा, "ये सब रातों-रात नहीं हुआ लेकिन ये दृढ़निश्चयी और समर्पित महिलाओं के बिना भी नहीं हो सकता था."

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