ब्रिटेन में जाकर बसना, अब होगा सपना

 सोमवार, 11 जून, 2012 को 14:48 IST तक के समाचार
ब्रिटेन

ब्रिटेन में मौजूद अप्रवासियों में बड़ी संख्या में भारत, पाकिस्तान और एशियाई नागरिक शामिल हैं.

ब्रिटेन जाकर रहने वाले अप्रवासी भारतीयों या दूसरे एशियाई देशों के नागरिकों के लिए वहां जाकर बसने का सपना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि सरकार आप्रवासन से जुड़े नए नियम लाने वाली है.

ब्रिटेन की गृह मंत्री टेरेसा मे संसद में जल्द ही इससे जुड़ी 'आर्थिक स्वतंत्रता' नियम पेश करने जा रही हैं.

गृहमंत्री की योजना के तहत अब ब्रिटेन आकर बसने वाले वो अप्रवासी जो पत्नी और बच्चे को साथ रखना चाहते हैं, उनकी वार्षिक आय कम से कम 18,600 पाउंड होनी चाहिए.

अगर अप्रावासी के तीन बच्चे होंगे तो आमदनी की न्यूनतम सीमा 27,200 पाउंड हो जाएगी.

गैर-यूरोपीय संघ के देशों से ब्याह कर लाई गई पत्नी या पति के प्रमाणीकरण की अवधि को दो से बढ़ाकर पांच साल किया जा रहा है. कहा जा है कि ये वैसी शादियों को रोकने के लिए है जो महज ब्रतानी नागरिकता पाने के लोभ में की जाती हैं.

परिवार के बुजुर्गों को आप्रवासन की इजाजात नहीं दी जाएगी क्योंकि उनके राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा पर बोझ बनने का खतरा होता है.

प्रस्ताव

प्रस्तावित नियम के भीतर आपराधिक गतिविधियों में दोषी पाए गए विदेशी नागरिकों को मानवधिकार के नाम पर ब्रिटेन में रहने की इजाजात नहीं मिलेगी.

"हमने अपनी अदालतों में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जिसमें आपराधिक पृष्टभूमि वाले लोग सिर्फ इसलिए अपने देश वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि अदालतें ऐसा करने नहीं देती और मुझे भी ऐसा लगता है कि यूरोपीय समझौता उन्हें ऐसा करने में मदद करती है."

थेरेसा मे, गृह मंत्री, ब्रिटेन

टेरेसा मे सासंदो को ये समझाने की कोशिश कर रही हैं कि परिवार के साथ जीवन गुजारने का अधिकार ऐसा अधिकार नहीं है जिसे चैलेंज नहीं किया जा सकता है.

संसद में पेश किए जाने वाला ये प्रस्ताव मानवाधिकारों पर यूरोपीय समझौते के आठवें अनुच्छेद को चुनौती देता है.

टेरेसा मे ने बीबीसी से कहा कि सरकार को 'पारिवारिक जीवन के अधिकार' में शर्ते लागू करने का अधिकार है.

टेरेसा मे कहती हैं, ''हमने अपनी अदालतों में ऐसे कई मामले देखे हैं जिसमें आपराधिक पृष्टभूमि वाले लोग सिर्फ इसलिए अपने देश वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि अदालतें ऐसा करने की इजाज़त नहीं देती और मुझे भी ऐसा लगता है कि यूरोपीय समझौता उन्हें ऐसा करने में मदद करती है.''

मेय कहती हैं कि वे ऐसे कानून बनाना चाहती हैं जो सार्वजनिक और निजी हितों के बीच सांमजस्य स्थापित कर सके.

ब्रिटेन

ऐसे 185 मामले सामने आए जिनमें दोषी अप्रवासियों को वतन वापस नहीं भेजा जा सका

स्काई न्यूज़ के मुताबिक गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार ऐसे 185 मामले सामने आए हैं जिसमें अप्रवासी कैदियों ने यूरोपीय समझौते के 8वें अनुच्छेद का हवाला देकर खुद को देश निकाला दिए जाने की मांग को निरस्त करवाया है.

गलत इस्तेमाल

लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लगता है कि गृहमंत्री टेरेसा मेय कानून के साथ छेड़छाड़ कर रही हैं.

मानवाधिकार मामलों के वकील लूईस क्रिस्चन कहती हैं, ''गृह मंत्री को ये अधिकार नहीं है कि वो जजों को दिशा निर्देश दे. जजों को हर एक मामले को अलग तरह से देखना और समझना होता है और सच्चाई ये है कि 8वें अनुच्छेद सें संबंधित मामलों में काफी कम अप्रवासी शामिल हैं.''

लूईस आगे कहती हैं,''ये काफी चिंता का विषय है कि हमें गृह मंत्री के मुंह से ऐसे बयान सुनने को मिल रहे हैं, जिसमें ये जताया जा रहा है कि वो या तो जजों पर धौंस जमा सकती हैं या यूरोपीय समझौते के प्रावधानों में बदलाव ला सकती है.''

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