बेवफाई में महिलाएं आगे या मर्द?

 रविवार, 3 जून, 2012 को 05:13 IST तक के समाचार
बेवफाई

बेवफाई पर शोध करने में सबसे बड़ी समस्या है कि इसका एक दायरा तय कर पाना मुश्किल है.

आम तौर पर दिन-रात जो 'जानकारियां' सामने आती हैं उनका निष्कर्ष ये निकाला जाता है कि महिलाओं के मुकाबले पुरूष अपने जीवनसाथी से ज्यादा बेवफा होते है. लेकिन कितने विश्वस्नीय होते है ये आंकड़े, क्या इसकी सटीक गणना कर पाना संभव है?

उपरी तौर पर देखा जाए तो इसका जवाब पुरूषों के पक्ष में तो नहीं दिखता.

अमरीका में साल 2006 में किए गए एक सर्वे में महिलाओं के मुकाबले दोगुने पुरुषों ने माना कि उन्होंने अपने जीवनसाथी के अलावा अन्य महिलाओं से भी यौन संबंध बनाए.

ब्रिटेन में इस विषय पर आखिरी बार साल 2000 में किए गए शोध में पता चला कि बीते साल में 15 फीसदी पुरूषों ने बेवफाई की जबकि महिलाओं में ये आंकड़ा नौ फीसदी पर रहा.

इस सर्वे की प्रमुख शोधकर्ता, डॉक्टर कैथरीन मर्सर ने कहा, “इस सर्वे में महिला या पुरूष होने का प्रभाव पड़ता है, महिलाएं अपनी बेवफाई कबूलने में हिचकिचाती हैं.”

उन्होंने कहा, “हम जाकर ये पता नहीं कर सकते की कौन वफादार है और कौन नहीं, इसलिए जो जानकारी लोगों से मिलती है हमे उसपर विश्वास करना पड़ता है.”

लेकिन कहानी यहां खत्म नही होती है.

यौन रिश्ते

बेवफाई पता लगाने में दिक्कतें

"सबसे पहली समस्या है कि आप ये सवाल लोगों से पूछेंगे कैसे? कुछ शोध अनुमानों पर भी टिके होते है. दूसरी चीज है कि अगर आप बेवफाई की बात कर रहे है तो इसका मतलब क्या है? अलग-अलग लोगों के अपने-अपने दायरे होते है. क्या आप चुंबन लेते समय दायरे बनाते है? कई लोगों मानते है कि पॉर्न देखना या फेसबुक पर चैटिंग करना बेवफाई करने जैसा है. रिश्तों या यौन संबंध के बारे में जब भी बात होती है तो हम अपने को महिला-पुरूष दायरे में फंसा पाते है. "

पेट्रा बॉयंटन, मनोचिकित्सक

ब्रितानी शोध में मिली जानकारी से पता चलता है कि आम तौर पर पुरूषों के मुकाबले महिलाओं के ऐसे कम साथी होते है जिनके साथ वो यौन संबंध बनाती है.

इसका एक और कारण उम्र हो सकता है.

मर्सर ने कहा, “हमें पता है कि आम तौर पर पुरूष अपने महिला साथियों से उम्र में ज्यादा बढ़े होते है.”

वो आगे कहती है, “अगर आप एक परिस्थिति के बारे में सोचे जब एक शादीशुदा पुरूष अपने से छोटी महिला से विवाहेतर संबंध रखे, जो आम तौर पर गैरशादीशुदा होगी क्योंकि उसकी उम्र कम होगी, ऐसी स्थिति में पुरुष किसी से बेवफाई कर रहा होगा लेकिन महिला नहीं.”

गैरशादीशुदा महिला का किसी शादीशुदा मर्द के साथ यौन संबंध रखना बेवफाई है या नहीं ये आपके खुद के मौलिक सिद्धांतों पर निर्भर करेगा.

'खुले' रिश्ते

इस बीच गौर करने वाली बात ये भी है कि कुछ रिश्ते ‘खुले’ होते हैं जिसमें कई साथियों के साथ यौन संबंध बनाने पर भी इसे बेवफाई नहीं माना जाता. लेकिन आकड़ों में मौलिकता तलाशने की कोई गुंजाइश नहीं होती.

इसलिए डॉक्टर मर्सर भी अपने शोध में इसे सीधे तौर पर बेवफाई कहने से बचती रही.

उन्होंने कहा, “बेवफाई एक गंभीर शब्द है, जबकि साथी बदलना इन आंकड़ों के संदर्भ में ज्यादा सटीक लगता है.”

फाइल

एक शोध के अनुसार कम उम्र के पुरूषों के एक से ज्यादा साथी होने की संभावना ज्यादा है.

ब्रिटेन में किए गए शोध में पता चला कि पांच वर्षों में चार फीसदी पुरूषों ने यौन संबंध बनाने के लिए पैसे दिए. अगर हम ये माने कि महिला यौनकर्मियों के मुकाबले उनकी सेवाएं लेने वाले पुरूषों की तादात ज्यादा है तो फिर वैश्यावृति से भी इस शोध की कई विसंगतिया दूर हो सकती है.

बेवफा कौन?

लेकिन क्या इस तरह के शोध से पता लगाया जा सकता है कि किस तरह के मर्द बेवफाई कर सकते है?

अमरीका के एक सामाजिक सर्वे संस्था के प्रमुख टॉम स्मिथ ने इसका जवाब ढूंढने के लिए काफी काम किया है.

उन्होंने कहा, “जो लोग कम धार्मिक होते है, या फिर अपने जीवनसाथी से दूर रहते है, उनके बेवफा होने की संभावनाएं ज्यादा होती है.”

डॉक्टर मर्सर का कहना है कि ज्यादा उम्र के लोगों के मुकाबले युवाओं के कई ‘खास’ संबंध होने की संभावना अधिक होती है.

इसलिए अगर आप किसी ऐसे युवा पुरूष की महिला साथी है जो धार्मिक ना हो और आपसे दूर ज्यादा समय बिताता हो तो सावधान हो जाइए!

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