ओबामा ने की पाकिस्तान की अनदेखी

 मंगलवार, 22 मई, 2012 को 11:48 IST तक के समाचार

कैसे निकलेगा अफगानिस्तान से नैटो?

नैटो 2014 तक अफगानिस्तान से निकलने की तैयारी कर रहा है, मगर सेना का सारा ताम-झाम वहाँ से बाहर निकलेगा कैसे, अभी इसे लेकर अनिश्चय है.

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राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जिन देशों का अफगानिस्तान में सेना को सामान की आपूर्ति में सहयोग के लिए धन्यवाद किया, उनमें पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है. इसे साफतौर पर पाकिस्तान की अनदेखी माना जा रहा है.

हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके देश का नाम ना लिए जाने को अधिक महत्व नहीं दिया है.

सोमवार को शिकागो में हुए नेटो सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन बराक ओबामा ने कहा, "मैं राष्ट्रपति करज़ई के अलावा मध्य एशिया और रूस के अधिकारियों अफ़गानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग बल को महत्वपूर्ण ट्रांसिट रूट मुहैया करवाने के लिए स्वागत करता हूं. "

इस अनदेखी की जड़ में पाकिस्तान द्वारा पिछले वर्ष अपने रास्तों का इस्तेमाल नेटो सेनाओं को आपूर्ति के लिए नहीं करने देना है.

रास्ते पर तकरार बरककार

करज़ई, ओबामा और जरदारी

करजई ने इस छोटी सी मुलाकात के बारे में कहा कि ये महज एक 'फोटोग्राफ के लिए अवसर' था.

एक पाकिस्तानी चौकी पर पिछले वर्ष नवंबर में हुए नेटो हवाई हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने के बाद पाकिस्तान ने अपने यहां से नेटो के लिए सामान ढोने वाले ट्रकों की आवाजाही रोक दी थी.

नेटो सम्मेलन से पहले और इसके दौरान भी कई कोशिशों के बाद अमरीका और पाकिस्तान के बीच नेटो के सामान के लिए रास्ता खोलने पर समझौता नहीं हो पाया है.

इसके अलावा बराक ओबामा और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच कोई औपचारिक बातचीत भी नहीं हुई है. हालांकि दोनों नेता सम्मलेन के दौरान थोड़े वक्त के लिए मिले ज़रुर थे.

उस मुलाकात के दौरान हुई बातचीत के बारे में बाद में बराक ओबामा ने बताया, "ये ध्यान में रखिए कि राष्ट्रपति जरदारी के साथ मेरी बातचीत सम्मेलन स्थल की ओर जाते हुए हुई थी और वो बहुत ही छोटी थी. उसमें मैंने उन्हें वही बताया जो हम सार्वजनिक रूप से कहते रहते हैं. मेरे विचार से पाकिस्तान को अफ़गानिस्तान के हल का हिस्सा होना ही है. और ये हमारे राष्ट्रीय हित में है कि पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक, संपन्न और स्थिर देश रहे."

पाकिस्तान से रिश्ते

"पाकिस्तान की तरफ से सप्लाई रूट पिछले छह महीनों से बंद हैं. हमें इस बात की कोई उम्मीद नहीं थी कि अमरीकी राष्ट्रपति नेटो सप्लाई निष्कासित किए जाने को सराहेंगे या उसकी तारीफ़ करेंगे."

फरहतुल्ला बाबर, पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता

राष्ट्रपति ओबामा ने माना कि पाकिस्तान के साथ तनाव के कारण अफगानिस्तान में अमरीकी हितों को नुकसान पहुंच सकता है.

उन्होंने कहा, "उस क्षेत्र में दस साल की सैन्य मौजूदगी के बाद जाहिरा तौर होने वाले तनावों को हमें पार पाना होगा. मैं वहां की चुनौतियों को हल्के में नहीं ले रहा हूं."

पाकिस्तान नेटो समूह का सदस्य नहीं है लेकिन उसे सम्मेलन बुलाया गया था क्योंकि अफ़गानिस्तान पर उसका प्रभाव है और साथ ही पिछले वर्ष तक पाकिस्तान नेटो की सामान की आपूर्ति का सबसे प्रमुख रास्ता था.

अंतिम समय में शिकागो सम्मेलन में जरदारी को न्योता देने के बाद लगा था कि अब दूरियां कम हो रही हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं है. जरदारी इस उम्मीद से ओबामा के गृह शहर शिकागो पहुंचे थे कि शायद उन्हे अमरीकी राष्ट्रपति से सीधी बातचीत का अवसर मिले.

ये अवसर अफ़गान राष्ट्रपति हामिद करज़ई को तो मिला लेकिन ज़रदारी को नहीं. जिस थोड़े वक्त के लिए ओबामा ने जरदारी से बात की उसके बारे में करज़ई ने सीएनएन को बताया कि वो महज एक फ़ोटोग्राफ़ खिंचवाने का अवसर भर था.

लेकिन पाकिस्तान अधिकारी इस अनदेखी पर अधिक ध्यान नहीं दे रहे हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने पत्रकारों को बताया, "पाकिस्तान की तरफ से सप्लाई रूट पिछले छह महीनों से बंद हैं. हमें इस बात की कोई उम्मीद नहीं थी कि अमरीकी राष्ट्रपति नेटो सप्लाई निष्कासित किए जाने को सराहेंगे या उसकी तारीफ़ करेंगे."

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